Gust House Building
प्रस्तावना
विज्ञान आश्रम, पाबल में मुझे गेस्ट हाउस बिल्डिंग का प्रोजेक्ट करने का अवसर मिला। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य था निर्माण (Construction) की बुनियादी तकनीकों को समझना, आवश्यक उपकरणों का उपयोग सीखना और वास्तविक निर्माण कार्य का अनुभव प्राप्त करना। इस कार्य के दौरान मैंने गेस्ट हाउस बनाने की पूरी प्रक्रिया—ब्लॉक लगाने से लेकर प्लास्टर, दरवाज़ा फिटिंग और अन्य तकनीकों—को practically सीखा।
सर्वे
काम शुरू करने से पहले हमने यह सर्वे किया कि गेस्ट हाउस बनाने में कौन-कौन सी चीज़ों की आवश्यकता होती है।
- सबसे पहले जानकारी ली कि निर्माण कार्य कैसे किया जाता है।
- फिर देखा कि मुख्य सामग्रियों में cement form blocks, block joining mortar, और cement का उपयोग होता है।
- इसके बाद निर्माण के लिए आवश्यक उपकरणों का अवलोकन किया।
- अंत में साइट पर उपलब्ध संसाधनों और ब्लॉक्स की संख्या की जाँच की।
उद्देश्य
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य था—
- गेस्ट हाउस निर्माण की प्रक्रिया को practically सीखना
- निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों और टूल्स का ज्ञान प्राप्त करना
- ब्लॉक सेटिंग, मिक्सिंग, प्लास्टरिंग और डोर फिटिंग जैसे कौशलों में दक्षता प्राप्त करना
- टीमवर्क और साइट मैनेजमेंट को समझना
सामग्री
गेस्ट हाउस निर्माण में प्रयोग की गई मुख्य सामग्री:
- Cement Form Blocks
- Block Joining Mortar
- Cement
- पानी
- दरवाज़े का फ्रेम
- प्लास्टर मटेरियल
टूल्स
निर्माण कार्य में उपयोग किए गए प्रमुख उपकरण—
- Spirit Level – दीवार सीधी है या नहीं, यह जाँचने के लिए
- Level Tube – लेवल चेक करने के लिए
- Vadambak (वडंबक) – ब्लॉक सही जगह फिट करने के लिए
- Patra (पात्रा) – मिक्सिंग और प्लास्टर लगाने के लिए
- Kavchi (कवची) – सामग्री उठाने और लगाने के लिए
कृती
काम की शुरुआत हमने ब्लॉक्स और टूल्स की जाँच से की। फिर—
- Block joining mortar को पानी के साथ मिलाकर block-setting mix तैयार किया।
- Vadambak का उपयोग करके ब्लॉक्स को सही दिशा और लेवल में फिट किया।
- Spirit level और level tube से दीवार का सीधापन चेक किया।
- दीवारें बन जाने के बाद प्लास्टर की प्रक्रिया शुरू की और Patra से प्लास्टर लगाया।
- इसके बाद दीवार के बीच में दरवाज़े का फ्रेम लगाया और उसे mortor से मजबूत किया।
निरीक्षण
निर्माण करते समय हर स्टेप पर निरीक्षण किया गया—
- ब्लॉक सही लेवल पर हैं या नहीं
- मिक्स की क्वालिटी सही है या नहीं
- प्लास्टर समान रूप से लगाया जा रहा है या नहीं
- दरवाज़ा ठीक तरह फिट हुआ है या नहीं
काम के दौरान कुछ समस्याएँ भी आईं, जैसे block joining mortar के कारण हाथों और स्किन पर सफेद परत जमना।
परिणाम
इस प्रोजेक्ट के अंत तक—
- एक मजबूत और सुंदर दीवार तैयार हुई
- प्लास्टर और ब्लॉक सेटिंग का सही अनुभव मिला
- उपकरणों का उपयोग करने में दक्षता प्राप्त हुई
- निर्माण तकनीकों की समझ विकसित हुई
यह प्रोजेक्ट मेरे लिए बहुत सीखने वाला और प्रेरणादायक अनुभव रहा।
भविष्य में उपयोग
गेस्ट हाउस बनने के बाद इसका उपयोग—
- मेहमानों के ठहरने
- स्टूडेंट्स और इंटर्न्स के रहने
- विज़िटर्स के accommodation
- आश्रम के विकासात्मक कार्यों में सहायता
के लिए किया जाएगा।
इसके अलावा, मुझे प्राप्त यह अनुभव भविष्य में किसी भी निर्माण कार्य में बहुत उपयोगी रहेगा।
कॉस्टिंग :
| अ. क्र. | मालाचे नाव | एकूण माल | दर | एकूण किंमत |
| 1 | ACC | 1600 | 80 | 1,28,000 |
| 2 | केमिकल | 23 | 500 | 11,500 |
| 3 | मजुरी [25%] | 34,875 | ||
| total | 174,375 |
CPM Chart
| Activity | कार्य का नाम | Duration (Days) | Predecessor | Early Start | Early Finish | Remarks / Critical |
|---|---|---|---|---|---|---|
| A | सर्वे और साइट निरीक्षण | 5 | — | Day 1 | Day 5 | Critical |
| B | सामग्री और टूल्स की व्यवस्था | 5 | A | Day 6 | Day 10 | Critical |
| C | ब्लॉक जॉइनिंग मिक्स तैयारी | 3 | B | Day 11 | Day 13 | Critical |
| D | ब्लॉक सेटिंग / दीवार निर्माण | 15 | C | Day 14 | Day 28 | Critical |
| E | लेवल और सीधापन जाँच | 3 | D | Day 29 | Day 31 | Critical |
| F | प्लास्टर कार्य | 12 | E | Day 32 | Day 43 | Critical |
| G | दरवाज़े का फ्रेम फिटिंग | 7 | F | Day 44 | Day 50 | Critical |
| H | अंतिम निरीक्षण व फिनिशिंग | 10 | G | Day 51 | Day 60 | Critical |
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Tiny House
प्रस्तावना
आज के समय में बढ़ती जनसंख्या और सीमित जगह के कारण छोटे लेकिन उपयोगी घरों की आवश्यकता बढ़ रही है। टिनी हाउस एक ऐसा ही आधुनिक समाधान है, जिसमें कम जगह, कम लागत और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से रहने की सुविधा मिलती है।
इस परियोजना के अंतर्गत हमने एक टिनी हाउस की संरचना, डिजाइन, फर्नीचर, प्लंबिंग और वायरिंग का व्यावहारिक अध्ययन किया।
सर्वे
परियोजना शुरू करने से पहले हमने विज्ञान आश्रम की कंप्यूटर लैब में विभिन्न टिनी हाउस डिज़ाइनों का सर्वे किया।
इस सर्वे के दौरान हमने अलग-अलग टिनी हाउस की संरचना, अंदरूनी व्यवस्था, सामग्री और उपयोगिता का अध्ययन किया।
इसके बाद हमने समूह में चर्चा करके अपने प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त डिज़ाइन तय किया।
उद्देश्य
इस परियोजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- टिनी हाउस की संरचना को समझना
- सीमित स्थान में घर बनाने की तकनीक सीखना
- निर्माण कार्य में टीमवर्क का अनुभव प्राप्त करना
- प्लंबिंग और वायरिंग का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना
- कम लागत वाले आवास की अवधारणा को समझना
उपकरण
इस परियोजना में उपयोग किए गए प्रमुख उपकरण निम्नलिखित हैं:
- फावड़ा और कुदाल
- हथौड़ा
- स्क्रूड्राइवर
- ड्रिल मशीन
- माप फीता
- सीमेंट और RCC सामग्री
- मेटल फ्रेम
- प्लंबिंग और वायरिंग उपकरण
मापन
- टिनी हाउस का आकार: 10 फीट × 10 फीट
- ऊँचाई: 8 फीट
- नींव के लिए गड्ढे: 1 फीट गहराई के 4 गड्ढे
- दरवाज़ा: 3 फीट × 7 फीट
- खिड़की: 4 फीट × 3 फीट
कार्य प्रक्रिया
- सबसे पहले हमने ज़मीन में एक-एक फीट गहराई के चार गड्ढे खोदे।
- इन गड्ढों में RCC कॉलम बनाकर मजबूत नींव तैयार की।
- नींव पर टिनी हाउस का मेटल फ्रेम स्थापित किया गया।
- फ्रेम के ऊपर दीवारें और छप्पर लगाया गया।
- इसके बाद दरवाज़े और खिड़कियाँ लगाई गईं।
- फिर प्लंबिंग और वायरिंग का कार्य किया गया।
- अंत में बाथरूम, शेड और अंदरूनी फर्नीचर तैयार किया गया।
निरीक्षण
- टिनी हाउस की संरचना मजबूत और स्थिर पाई गई।
- सीमित जगह में सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
- प्लंबिंग और वायरिंग सही ढंग से कार्य कर रही हैं।
- उपयोग की गई सामग्री सुरक्षित और टिकाऊ है।
भविष्य में उपयोग
टिनी हाउस का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है:
- कम बजट में रहने के लिए
- छात्रावास या गेस्ट हाउस के रूप में
- आपदा के समय अस्थायी आवास
- ग्रामीण और पर्यावरण अनुकूल घर
मैंने इस परियोजना से क्या सीखा
इस परियोजना से मुझे निम्नलिखित बातें सीखने को मिलीं:
- टिनी हाउस का संपूर्ण निर्माण कार्य
- टीम में मिलकर काम करने का महत्व
- प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जानकारी
- योजना बनाना और समस्या का समाधान करना
- आत्मविश्वास और व्यावहारिक कौशल में वृद्धि
CPM Chart
| Activity | कार्य का नाम | Duration (Days) | Predecessor | Early Start (ES) | Early Finish (EF) | Remarks / Critical |
|---|---|---|---|---|---|---|
| A | सर्वे और डिज़ाइन चयन | 4 | — | Day 1 | Day 4 | Critical |
| B | मापन और साइट तैयारी | 3 | A | Day 5 | Day 7 | Critical |
| C | नींव के लिए गड्ढे खोदना | 4 | B | Day 8 | Day 11 | Critical |
| D | RCC कॉलम और नींव निर्माण | 8 | C | Day 12 | Day 19 | Critical |
| E | मेटल फ्रेम स्थापना | 6 | D | Day 20 | Day 25 | Critical |
| F | दीवारें और छप्पर निर्माण | 8 | E | Day 26 | Day 33 | Critical |
| G | दरवाज़ा और खिड़की फिटिंग | 4 | F | Day 34 | Day 37 | Critical |
| H | प्लंबिंग कार्य | 5 | G | Day 38 | Day 42 | Critical |
| I | वायरिंग और इलेक्ट्रिकल फिटिंग | 3 | H | Day 43 | Day 45 | Critical |
| J | फर्नीचर और फिनिशिंग | 0 (Overlaps) | I | Day 44 | Day 45 | Critical |
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Gust House Grill Making
प्रस्तावना
गेस्ट हाउस की सुरक्षा और मजबूत निर्माण के लिए ग्रिल लगाना एक महत्वपूर्ण कार्य है। इस परियोजना में हमने तीन अलग-अलग मापों की ग्रिल का मापन किया, उनकी लागत (कॉस्टिंग) निकाली, आवश्यक सामग्री खरीदी और स्वयं ग्रिल तैयार की। इस प्रक्रिया में वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, मापन, फ्रेम बनाना, रेड ऑक्साइड और पेंटिंग जैसी तकनीकी कौशलों को प्रत्यक्ष रूप से सीखने और उपयोग करने का अवसर मिला।
सर्वे :
सबसे पहले गेस्ट हाउस की खिड़कियों का मापन किया गया, जिसमें निम्नलिखित तीन अलग-अलग आकार की ग्रिल की आवश्यकता पाई गई:
पहली ग्रिल: 6’ × 5’
दूसरी ग्रिल: 4’ × 7’
तीसरी ग्रिल: 2’ × 20”
माप के आधार पर कॉस्टिंग की गई और उसी अनुसार सामग्री खरीदी गई।
उद्देश्य :
- गेस्ट हाउस के लिए आवश्यक आकार की मजबूत ग्रिल तैयार करना
- गेस्ट हाउस को सुरक्षा प्रदान करना
- धातु कार्य, वेल्डिंग, ग्राइंडिंग और फ्रेम फैब्रिकेशन जैसे कौशलों का विकास करना
- कम लागत में अच्छी गुणवत्ता की ग्रिल बनाना
सामग्री :
- 30 × 3 L-एंगल
- 2 × 2 स्क्वेयर जाली
- 10 × 10 स्क्वेयर बार
- वेल्डिंग रॉड
- ग्राइंडिंग डिस्क
- रेड ऑक्साइड प्राइमर
- काला ऑयल पेंट
कार्य विधि :
सभी खिड़कियों के सटीक माप लिए गए। तीन अलग-अलग मापों की ग्रिल की कॉस्टिंग कर सामग्री खरीदी गई। 30 × 3 L-एंगल का उपयोग करके सभी ग्रिल की फ्रेम तैयार की गई।
4 × 7 ग्रिल के लिए फ्रेम में 2 × 2 की जाली लगाई गई। उस पर 4 इंच की दूरी पर क्षैतिज 10 × 10 स्क्वेयर बार लगाए गए तथा चार ऊर्ध्वाधर स्क्वेयर बार लगाए गए।
सभी बार और एंगल की वेल्डिंग करके मजबूती प्रदान की गई। वेल्डिंग के बाद पूरी ग्रिल की ग्राइंडिंग करके स्मूथ फिनिश दी गई। दीवार में फिट करने के लिए 30 × 3 एंगल के चार टुकड़े जोड़े गए।
ग्रिल पर पहले रेड ऑक्साइड प्राइमर लगाया गया, उसके बाद काला ऑयल पेंट लगाकर फिनिशिंग की गई।
आने वाली कठिनाइयाँ :
बड़ी ग्रिल को उठाना और सीधा रखना कठिन था।
तीन अलग-अलग माप होने के कारण प्रत्येक ग्रिल के लिए फ्रेम अलग-अलग तरीके से मापनी पड़ी।
स्क्वेयर बार के बीच की दूरी सटीक रखना समय-साध्य रहा।
वेल्डिंग के बाद जॉइंट्स को स्मूथ करने के लिए अधिक ग्राइंडिंग करनी पड़ी।
कॉस्टिंग :
| अ. क्र. | मालाचे नाव | एकूण माल | दर | एकूण किंमत |
| 1 | 30X3 L angal | 210 kg | 70 | 14,700 |
| 2 | 10X10 [] BAR | 424 kg | 60 | 25,440 |
| 3 | 2X2 जाळी | [168] 2f | 22 | 3,696 |
| 4 | 30 x 3 पट्टी | 27 kg | 70 | 1,890 |
| 5 | रॉड पुडा | 3 | 400 | 1,200 |
| 6 | कटींग व्हिल | 20 | 25 | 500 |
| 7 | ग्रीडिंग व्हिल | 20 | 30 | 600 |
| 8 | पॉलिश व्हिल | 10 | 30 | 600 |
| 9 | कटींग व्हिल [14 in] | 2 | 200 | 400 |
| 10 | प्रायमर | 4 l | 240 | 960 |
| 11 | थीनर | 2l | 120 | 240 |
| 12 | ब्रश | 4 | 40 | 160 |
| 13 | Electricity [10%] | 5,000 | ||
| 14 | मजुरी [15%] | 8,000 | ||
| 15 | TOTAL | 63,000 | ||
निरिक्षण :
सर्व ग्रील मजबूत व योग्य मापात तयार झाल्या. L-angle व स्क्वेअर बारच्या वापरामुळे ग्रीलची मजबुती खूप वाढली. पेंटिंगमुळे ग्रीलला आकर्षक मिळाले. संपूर्ण प्रक्रियेत मोजमाप अचूक ठेवणे सर्वात महत्त्वाचा भाग असल्याचे जाणवले.
निष्कर्ष :
प्रकल्पातून आम्हाला ग्रील फॅब्रिकेशनचे प्रत्यक्ष अनुभव मिळाले. वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, फ्रेम तयार करणे, प्राइमिंग आणि पेंटिंग या सर्व कामांचे चांगले ज्ञान झाले. गेस्ट हाऊससाठी आवश्यक असलेल्या सर्व ग्रील्स यशस्वीरीत्या तयार करण्यात आल्या आणि कमी खर्चात उच्च गुणवत्ता मिळवली.
भविष्यातील उपयोग :
पुढील काळात अशाच प्रकारचे ग्रील, दरवाजे, फेन्सिंग किंवा खिडकी संरचना तयार करता येतील. या कौशल्याचा वापर करून स्वतंत्र काम किंवा व्यवसाय सुरू करता येईल.
CPM Chart
| Activity | कार्य का नाम | Duration (Days) | Predecessor | Early Start (ES) | Early Finish (EF) | Remarks / Critical |
|---|---|---|---|---|---|---|
| A | माप लेना और सर्वे | 1 | — | Day 1 | Day 1 | Critical |
| B | सामग्री की खरीद और कॉस्टिंग | 2 | A | Day 2 | Day 3 | Critical |
| C | L-Angle फ्रेम कटिंग | 2 | B | Day 4 | Day 5 | Critical |
| D | फ्रेम असेंबली और वेल्डिंग | 3 | C | Day 6 | Day 8 | Critical |
| E | स्क्वेयर बार और जाली फिटिंग | 2 | D | Day 9 | Day 10 | Critical |
| F | ग्राइंडिंग और स्मूथ फिनिशिंग | 2 | E | Day 11 | Day 12 | Critical |
| G | रेड ऑक्साइड प्राइमर लगाना | 1 | F | Day 13 | Day 13 | Critical |
| H | काला ऑयल पेंट लगाना | 2 | G | Day 14 | Day 15 | Critical |
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कॉटर तैयार करना
प्रस्तावना :
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मजबूत, टिकाऊ और आकर्षक लोहे की खाट (Cot) तैयार करना था। खाट की डिजाइनिंग, फ्रेम बनाना, ग्राइंडिंग, वेल्डिंग, रेड ऑक्साइड और पेंटिंग जैसी सभी प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से करके मेटल फैब्रिकेशन के मूलभूत कौशल सीखना इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य रहा।
सर्वे :
- बाजार में उपलब्ध मेटल ट्यूब की मोटाई, प्रकार और गुणवत्ता का अध्ययन
- 1 × 2 स्क्वेयर ट्यूब तथा 1 × 1 सपोर्ट ट्यूब की मजबूती का परीक्षण
- वेल्डिंग और ग्राइंडिंग के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता
- रेड ऑक्साइड और ऑयल पेंट की टिकाऊपन क्षमता और लागत का अध्ययन
उद्देश्य :
इस खाट को तैयार करने के पीछे हमारा मुख्य उद्देश्य गेस्ट हाउस के लिए उपयोग योग्य, मजबूत, टिकाऊ और आरामदायक लोहे की खाट बनाना था।
गेस्ट हाउस में अधिक उपयोग और वजन सहने वाला फर्नीचर आवश्यक होता है, इसलिए लोहे की स्क्वेयर ट्यूब का उपयोग कर मजबूती को प्राथमिकता दी गई।
गेस्ट हाउस की सुविधा के लिए लंबे समय तक टिकने वाला, कम रखरखाव वाला और सुरक्षित फर्नीचर तैयार करना इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य था।
सामग्री :
- 1” × 2” स्क्वेयर ट्यूब
- 1” × 1” स्क्वेयर ट्यूब
- 0.75” × 0.75” स्क्वेयर ट्यूब
- वेल्डिंग रॉड
- ग्राइंडिंग डिस्क
- पॉलिश व्हील
- रेड ऑक्साइड प्राइमर
- काला ऑयल पेंट
- पॉलिश पेपर
- लंबी (मापने की टेप)
- कटिंग मशीन, वेल्डिंग मशीन
3D डिज़ाइन :




कार्य विधि :
सबसे पहले खाट (Cot) का पूरा डिज़ाइन तैयार किया गया।
माप, फ्रेम की संरचना और सपोर्ट की स्थिति निश्चित की गई।
1 × 2 स्क्वेयर ट्यूब का उपयोग करके ऊपर की मुख्य फ्रेम तैयार की गई।
कोनों पर सटीक जॉइंट बनाकर वेल्डिंग की गई।
फ्रेम की मजबूती के लिए 1 × 1 स्क्वेयर ट्यूब के कुल 2 सपोर्ट पीस लगाए गए।
सभी टुकड़ों को समान दूरी पर फिट किया गया।
पूरी फ्रेम की ग्राइंडिंग करके वेल्डिंग जॉइंट्स को साफ और स्मूथ बनाया गया।
15 इंच लंबाई के 1.5 × 1.5 स्क्वेयर ट्यूब के पैर लगाए गए।
पैरों की वेल्डिंग करने के बाद ग्राइंडिंग की गई।
पूरे कॉट को पॉलिश व्हील से पॉलिश किया गया।
फ्रेम को जंग से बचाने के लिए रेड ऑक्साइड प्राइमर लगाया गया।
रेड ऑक्साइड सूखने के बाद जोइंट्स पर पुट्टी (लेंबी) लगाई गई और फिर पॉलिश पेपर से घिसाई की गई।
अंत में कॉट पर काला ऑयल पेंट लगाकर फाइनल फिनिशिंग दी गई।
आने वाली कठिनाइयाँ :
पैर (Legs) और फ्रेम को एक ही लेवल पर लाना चुनौतीपूर्ण रहा
1 × 1 सपोर्ट पीस के माप को सटीक रखना
वेल्डिंग करते समय ट्यूब को सीधा रखने के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ी
ग्राइंडिंग के दौरान सतह को पूरी तरह समतल करने में अधिक समय लगा
रेड ऑक्साइड के सूखने में देरी होने के कारण अगली प्रक्रिया में विलंब हुआ
कॉस्टिंग :
| अ . क्र | मालाचे नाव | एकूण माल | दर | एकूण किंमत |
| 1 | 0.75 x 0.75 स्क्वेअर ट्यूब | 20′ | 25 | 500 |
| 2 | 1 x 2 स्क्वेअर ट्यूब | 360′ | 30 | 10,800 |
| 3 | 1 x 1स्क्वेअर ट्यूब | 100′ | 35 | 3,500 |
| 4 | 1/2 x 1/2 स्क्वेअर ट्यूब | 100′ | 40 | 4,000 |
| 5 | रॉड पुडा | 2 | 400 | 800 |
| 6 | कटींग व्हिल | 5 | 25 | 125 |
| 7 | ग्रीडिंग व्हिल | 5 | 30 | 150 |
| 8 | पॉलिश व्हिल | 3 | 30 | 150 |
| 9 | कटींग व्हिल [14 in] | 1 | 200 | 200 |
| 10 | लंबी | 2 kg | 500 | 1000 |
| 11 | प्रायमर | 2 L | 240 | 480 |
| 12 | थीनर | 2 L | 120 | 240 |
| 13 | काळा ऑईल पेंट | 2 L | 340 | 680 |
| 14 | रोलर | 1 | 50 | 50 |
| 15 | Electricity [10%] | 2,270 | ||
| 16 | मजुरी [15%] | 3,400 | ||
| 17 | total | 28,350 |
निरिक्षण :
वेल्डिंग और ग्राइंडिंग के कारण खाट (Cot) की मजबूती और फिनिशिंग उत्कृष्ट रही।
सभी सपोर्ट पीस का सही तरीके से उपयोग करने से फ्रेम को मजबूत आधार मिला।
रेड ऑक्साइड के कारण धातु को जंग से सुरक्षा मिली।
काले पेंट से खाट आकर्षक और टिकाऊ बनी।
निष्कर्ष :
इस परियोजना के माध्यम से मेटल फैब्रिकेशन के महत्वपूर्ण कौशल—डिज़ाइनिंग, कटिंग, वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, पॉलिशिंग और पेंटिंग—का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए एक मजबूत और उच्च गुणवत्ता की लोहे की खाट तैयार की गई।
भविष्य में उपयोग :
- घरेलू और हॉस्टल उपयोग के लिए टिकाऊ खाट
- कस्टम फर्नीचर डिज़ाइन के लिए आधारभूत कौशल
- विभिन्न आकारों के लोहे के फ्रेमवर्क तैयार करने हेतु तकनीकी ज्ञान
CPM Chart
| Activity | कार्य का नाम | Duration (Days) | Predecessor | Early Start (ES) | Early Finish (EF) | Remarks / Critical |
|---|---|---|---|---|---|---|
| A | माप लेना और डिजाइन तैयार करना | 3 | — | Day 1 | Day 3 | Critical |
| B | सामग्री की जांच और खरीद | 5 | A | Day 4 | Day 8 | Critical |
| C | मुख्य फ्रेम कटिंग (1×2 स्क्वेयर ट्यूब) | 4 | B | Day 9 | Day 12 | Critical |
| D | फ्रेम असेंबली और वेल्डिंग | 6 | C | Day 13 | Day 18 | Critical |
| E | सपोर्ट पीस फिटिंग (1×1 स्क्वेयर ट्यूब) | 2 | D | Day 19 | Day 20 | Critical |
| F | पैर (Legs) फिटिंग और वेल्डिंग | 2 | E | Day 21 | Day 22 | Critical |
| G | ग्राइंडिंग और पॉलिशिंग | 3 | F | Day 23 | Day 25 | Critical |
| H | रेड ऑक्साइड प्राइमर लगाना | 2 | G | Day 26 | Day 27 | Critical |
| I | पुट्टी और फिनिशिंग | 1 | H | Day 28 | Day 28 | Critical |
| J | काला ऑयल पेंट और अंतिम फिनिशिंग | 2 | I | Day 29 | Day 30 | Critical |
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Sliding Window Training
प्रस्तावना
स्लाइडिंग विंडो वर्कशॉप (एल्यूमिनियम व काँच) एक व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें प्रतिभागियों को एल्यूमिनियम फ्रेम और काँच से बनी स्लाइडिंग खिड़की बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया सिखाई जाती है।
इस वर्कशॉप में आधुनिक भवन निर्माण में उपयोग होने वाली स्लाइडिंग विंडो की डिजाइन, माप, फिटिंग और इंस्टॉलेशन की जानकारी दी जाती है।
स्लाइडिंग विंडो कम जगह में आसानी से खुलने-बंद होने वाली, मजबूत और आकर्षक संरचना होती है, जो आजकल घरों, ऑफिस और दुकानों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
सर्वे
एल्यूमिनियम स्लाइडिंग विंडो का उपयोग विभिन्न स्थानों पर किया जाता है:
- आवासीय भवन (घर और फ्लैट)
- व्यावसायिक भवन (ऑफिस, शोरूम)
- दुकानें और मॉल
- अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान
- आधुनिक इंटीरियर डिज़ाइन प्रोजेक्ट्स
इस सर्वे से यह स्पष्ट होता है कि स्लाइडिंग विंडो निर्माण कार्य एक उपयोगी और रोजगार-उन्मुख कौशल है।
उद्देश्य
- एल्यूमिनियम स्लाइडिंग विंडो निर्माण की पूरी जानकारी देना
- सही माप लेने और फ्रेम तैयार करने का प्रशिक्षण देना
- काँच फिटिंग की सुरक्षित तकनीक सिखाना
- हार्डवेयर (रोलर, लॉक, ब्रश आदि) की पहचान कराना
- प्रतिभागियों को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना
साहित्य / सामग्री
स्लाइडिंग विंडो वर्कशॉप के लिए आवश्यक सामग्री:
- एल्यूमिनियम फ्रेम सेक्शन
- काँच (साधारण / टफन / फ्रोस्टेड)
- रोलर
- लॉक और हैंडल
- ब्रश और रबर बीडिंग
- स्क्रू और फास्टनर
- कटिंग मशीन
- ड्रिल मशीन
- मापने का टेप
- सेफ्टी ग्लव्स और चश्मा
प्रक्रिया / कार्यविधि
- साइट का निरीक्षण और सही माप लेना
- एल्यूमिनियम फ्रेम को आवश्यक आकार में काटना
- फ्रेम की असेंबली करना
- ट्रैक और रोलर फिट करना
- काँच को सावधानीपूर्वक फ्रेम में लगाना
- लॉक, हैंडल और ब्रश फिट करना
- स्लाइडिंग मूवमेंट की जाँच करना
- अंतिम फिनिशिंग और सफाई
अवलोकन
- स्लाइडिंग विंडो कम जगह में आसानी से संचालित होती है
- एल्यूमिनियम फ्रेम मजबूत और टिकाऊ होता है
- काँच से प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन मिलता है
- रखरखाव कम होता है
- डिजाइन देखने में आधुनिक और आकर्षक होती है
निष्कर्ष
एल्यूमिनियम और काँच से बनी स्लाइडिंग विंडो वर्कशॉप प्रतिभागियों को एक व्यावहारिक और रोजगारपरक कौशल प्रदान करती है। यह वर्कशॉप निर्माण और इंटीरियर उद्योग में करियर के नए अवसर खोलती है।
कॉस्टिंग
| Sr. No | Item / Activity | Quantity / Notes | Cost (₹) |
|---|---|---|---|
| 1 | एल्यूमिनियम फ्रेम सेक्शन | आवश्यक अनुसार | 1,600 |
| 2 | काँच (साधारण / फ्रोस्टेड) | 1 पैनल | 900 |
| 3 | रोलर सेट | 1 सेट | 300 |
| 4 | लॉक और हैंडल | 1 सेट | 250 |
| 5 | ब्रश व रबर बीडिंग | — | 200 |
| 6 | स्क्रू व फास्टनर | — | 150 |
| 7 | मजदूरी (Labour) | फ्रेम कटिंग, असेंबली, काँच फिटिंग व इंस्टॉलेशन | 400 |
| कुल लागत | Material + Labour + Hardware | 3,800 |
आर.सी.सी. कॉलम
प्रस्तावना
नर्सरी शेड के लिए मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित संरचना आवश्यक होती है। वर्षा का पानी, सूर्यप्रकाश और हवा के प्रभाव को सहन करने के लिए आर.सी.सी. कॉलम का उपयोग किया जाता है।
इस परियोजना में नर्सरी शेड के लिए आर.सी.सी. कॉलम का निर्माण किया गया है, जिसमें लोहे की सरियों का ढांचा, उचित कवर और बॉक्स शटरिंग का उपयोग किया गया है।
सर्वे
नर्सरी शेड के लिए कॉलम निर्माण से पहले निम्नलिखित सर्वे किया गया:
- भूमि की सतह और मजबूती की जाँच की गई
- कॉलम निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान निर्धारित किया गया
- नक्शे के अनुसार माप लिए गए
- कॉलम की ऊँचाई 15 फीट 10 इंच निर्धारित की गई
- संरचना का डायगोनल 23 फीट तय किया गया
इस सर्वे के कारण कॉलम को सही स्थान पर और सुरक्षित रूप से स्थापित करना संभव हुआ।
उद्देश्य
- नर्सरी शेड के लिए मजबूत आधार तैयार करना
- आर.सी.सी. कॉलम के वास्तविक निर्माण की प्रक्रिया समझना
- लोहे की सरियों के ढांचे का सही उपयोग करना
- टिकाऊ और लंबे समय तक उपयोगी संरचना बनाना
सामग्री
इस आर.सी.सी. कॉलम के निर्माण में निम्न सामग्री का उपयोग किया गया:
- सीमेंट
- रेत
- गिट्टी
- पानी
- लोहे की सरियाँ (स्टील रॉड)
- बाइंडिंग वायर
- बॉक्स शटरिंग (लकड़ी / प्लाई)
- कवर (कवर ब्लॉक)
- मापने के लिए टेप और लेवल
प्रक्रिया
- कॉलम के स्थान की मार्किंग की गई
- लोहे की सरियाँ काटकर उनका ढांचा तैयार किया गया
- सरियों को उचित कवर दिया गया
- बॉक्स बनाकर शटरिंग लगाई गई
- शटरिंग को अच्छी तरह से कसकर फिक्स किया गया
- आर.सी.सी. कंक्रीट तैयार कर कॉलम में डाला गया
- वाइब्रेशन देकर कंक्रीट को सघन किया गया
- शटरिंग हटाने के बाद उचित क्योरिंग की गई
अवलोकन
- लोहे की सरियों का ढांचा मजबूत होने से कॉलम स्थिर रहा
- बॉक्स शटरिंग से कॉलम को सही आकार प्राप्त हुआ
- उचित मात्रा में कंक्रीट उपयोग करने से दरारें नहीं आईं
- क्योरिंग करने से कॉलम की मजबूती बढ़ी
निष्कर्ष
नर्सरी शेड के लिए तैयार किया गया आर.सी.सी. कॉलम मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ सिद्ध हुआ है। सही सर्वे, सटीक माप, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और उचित कार्यविधि के कारण यह कॉलम भविष्य के भार को आसानी से सहन कर सकता है।
भविष्य में उपयोग
- नर्सरी शेड को लंबे समय तक मजबूत आधार मिलेगा
- पॉलीथीन शेड, नेट शेड या टिन शेड निर्माण के लिए उपयोगी
- कृषि और बागवानी संरचनाओं के लिए आदर्श
- भविष्य में विस्तार करते समय कॉलम का पुनः उपयोग संभव
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