गेस्ट हाउस बांधकाम
प्रस्तावना
गेस्ट हाउस का निर्माण इस उद्देश्य से किया जाता है कि आने वाले अतिथियों को सुरक्षित, स्वच्छ और आरामदायक रहने की सुविधा मिल सके। इस निर्माण प्रक्रिया में योजना, सामग्री खरीद, नींव डालना, दीवारें बनाना, छत का काम, बिजली व पानी की लाइनें लगाना आदि कई चरण शामिल होते है
उद्देश्य
- अतिथियों को बेहतर रहने की सुविधा देना
- संस्थान/कंपनी की छवि को मजबूत बनाना
- मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाली इमारत का निर्माण करना
- सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त सुरक्षित गेस्ट हाउस तैयार करना
सर्व
गेस्ट हाउस निर्माण में उपयोग होने वाली प्रमुख सामग्री:
- सीमेंट
- ईंटें / ब्लॉक
- लोहे के सरिए (TMT Bars)
- पानी
- दरवाज़े और खिड़कियाँ (लकड़ी/एल्यूमिनियम)
- प्लंबिंग सामग्री – पाइप, नल, फिटिंग
- इलेक्ट्रिक सामग्री – वायर, स्विच, MCB, पैनल
- सोलर लाइन/पाइप (जरूरत अनुसार)
कृती
- साइट सर्वेक्षण – जगह का माप, लेवल जांच
- नक्शा व लेआउट तैयार करना
- नींव खोदना और कंक्रीट डालना
- स्तंभ (खंभे) और बीम बनाना
- दीवारों का निर्माण
- छत (स्लैब) डालना
- प्लंबिंग कार्य – पानी की लाइनें, नल फिटिंग
- इलेक्ट्रिकल कार्य – वायरिंग, स्विच बोर्ड
- दरवाजे और खिड़कियाँ लगाना
- फर्श टाइल्स लगाना
- प्लास्टर और पेंटिंग का कार्य
मुझे इससे क्या सीखने को मिला
- निर्माण के प्रत्येक चरण का महत्व समझ में आया
- सामग्री का सही उपयोग और मात्रा का ज्ञान हुआ
- पानी और बिजली की लाइनें कैसे लगाई जाती हैं, यह सीखने को मिला
- सुरक्षा नियमों का पालन करना कितना ज़रूरी है, यह समझ आया
- टीमवर्क और समन्वय की अहमियत जानी
निरीक्षण
- अच्छी गुणवत्ता की सामग्री से निर्माण अधिक मजबूत होता है
- सही योजना और समय प्रबंधन से काम तेज़ और सही होता है
- बारिश के मौसम में निर्माण कार्य धीमा पड़ जाता है
- प्रत्येक चरण की सही जाँच करने से गलतियाँ कम होती हैं
निष्कर्ष
गेस्ट हाउस का निर्माण एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है जिसमें बेहतर सामग्री, सही योजना और कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है। यदि निर्माण अच्छी तरह किया जाए तो गेस्ट हाउस लंबे समय तक टिकाऊ रहता है और अतिथियों को आरामदायक सुविधाएँ प्रदान करता है।
कोस्टिंग
| अ. क्र. | मालाचे नाव | एकूण माल | दर | एकूण किंमत |
| 1 | ACC | 1600 | 80 | 1,28,000 |
| 2 | केमिकल | 23 | 500 | 11,500 |
| 3 | मजुरी [25%] | 34,875 | ||
| total | 174,375 |
तेनी हाउस
प्रस्तावना
आज बढ़ती घरों की कीमत और जगह की कमी के कारण Tiny House एक अच्छा विकल्प बन रहा है। कम जगह में सभी सुविधाओं वाला, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल घर बनाया जा सकता है।
उद्देश्य
- कम जगह में सभी सुविधाओं वाला घर बनाना
- सस्ता, टिकाऊ और पोर्टेबल घर तैयार करना
- पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का उपयोग करना
- सरल जीवनशैली का संदेश देना
सर्वे
- बड़े घरों की तुलना में लागत कम होती है
- 200–400 वर्गफुट में तेनी हाउस बनाया जा सकता है
- लकड़ी, स्टील, एल्यूमिनियम, AAC ब्लॉक और सौर ऊर्जा का उपयोग
- अमेरिका, जापान और यूरोप में लोकप्रिय
सामग्री
- लकड़ी / स्टील फ्रेम
- छत के लिए टिन / सीमेंट शीट
- दीवारों के लिए सीमेंट शीट
- दरवाजे और खिड़कियाँ
- प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल सामग्री
प्रक्रिया
- तेनी हाउस का डिजाइन तैयार किया
- सामग्री एकत्र की
- बेस फ्रेम और स्ट्रक्चर बनाया
- दीवारें, छत और फर्श लगाए
- दरवाजे, खिड़कियाँ और इंटीरियर किया
- बिजली और पानी की व्यवस्था की
मुझे यह सिखाने को मिला
- कम सामग्री में उपयोगी घर बन सकता है
- डिजाइन और योजना का महत्व
- टीमवर्क और समय प्रबंधन
- टिकाऊ निर्माण की जानकारी
निरीक्षण
- घर मजबूत, हल्का और आकर्षक बना
- कम सामग्री से लागत कम हुई
- पोर्टेबल होने से कहीं भी ले जाया जा सकता है
निष्कर्ष
तेनी हाउस भविष्य का एक प्रभावी विकल्प है। यह कम खर्च, कम जगह और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देता है।
भविष्य में उपयोग
आपदा-ग्रस्त क्षेत्रों में अस्थायी निवासतेनी हाउस
ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती आवास
पर्यटन स्थलों पर कॉटेज

छत्री
प्रस्तावना
बरसात में भीगने से और गर्मी में तेज़ धूप से बचाव के लिए छत्री का उपयोग किया जाता है। छत्री मानव के दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण आविष्कार है। यह होटल और दुकानदारी के लिए भी उपयोगी होती है।
उद्देश्य
- बारिश से बचाव करना
- धूप से सुरक्षा पाना
- हल्के और सुविधाजनक साधन से संरक्षण प्राप्त करना
सर्वे
आज बाजार में विभिन्न प्रकार की छतरियाँ उपलब्ध हैं:
- फोल्डेबल छत्री
- लंबी हैंडल वाली छत्री
- ऑटो-ओपन छत्री
- डिजाइनर छत्री
सामग्री
- नायलॉन / पॉलिएस्टर कपड़ा
- लोहे / स्टील की रॉड
- स्प्रिंग और फोल्डिंग मैकेनिज़्म
कृती
- छत्री का हैंडल और स्टील रॉड तैयार किए
- रॉड में स्प्रिंग और फोल्डिंग सिस्टम जोड़ा
- कपड़ा नाप के अनुसार काटकर रॉड पर सिलाई की
- छत्री को खोल-बंद करके जांच की
मुझे यह सिखने को मिला
- छत्री बनाने की प्रक्रिया की जानकारी मिली
- सामग्री और संरचना का अध्ययन हुआ
- दैनिक उपयोग की वस्तु का महत्व समझा
निरीक्षण
- छत्री खोलना और बंद करना आसान है
- मजबूत फ्रेम और टिकाऊ कपड़ा अधिक समय तक चलता है
निष्कर्ष
छत्री एक सरल और उपयोगी साधन है, जो हमें बारिश और धूप से सुरक्षा प्रदान करती है।
भविष्य में उपयोग
- सोलर छत्री (ऊर्जा उत्पन्न करने वाली)
- अधिक वाटरप्रूफ और टिकाऊ सामग्री की छत्री
CPM चार्ट (समय प्रबंधन)
| कार्य | समय |
|---|---|
| 3D डिजाइन | 8 घंटे |
| सामग्री लाना | 3 घंटे |
| माप लेना | 8 घंटे |
| कटिंग और वेल्डिंग | 8 घंटे |
| पॉलिशिंग और ग्राइंडिंग | 6 घंटे |
| पाउडर कोटिंग | 8 घंटे |
| छत्री फिटिंग | 3 घंटे |
| प्लाज़्मा कटिंग | 2 घंटे |
| कुल समय | 6 दिन |



नर्सरी (बाहर काम )
प्रस्तावना
6×6 आकार के शेड के लिए चारों तरफ 1 से 1.5 फुट के एंगल सपोर्ट लगाए गए। 16 फुट के सफेद कोटी पत्रों का उपयोग करके हरी शेडनेट लगाई गई। प्रोफाइल लगाकर सेल्फ स्क्रू से शेडनेट फिट की गई। शेड को मजबूती देने के लिए GI एंगल की जोड़ाई की गई तथा हुक, वेल्डिंग और कीलों का उपयोग किया गया।
सर्वे
प्रोफाइल और सेल्फ स्क्रू की सहायता से शेडनेट लगाई गई। GI एंगल से जोड़ाई कर हुक, वेल्डिंग और कीलों का उपयोग किया गया। पीछे की ओर अतिरिक्त सपोर्ट के लिए GI एंगल लगाए गए। शेडनेट को प्रोफाइल से स्प्रिंग द्वारा जोड़ा गया तथा नीचे काले रंग की अच्छी कोटिंग की गई।
उद्देश्य
शेड को मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित बनाकर सूर्यप्रकाश, बारिश और धूल से संरक्षण प्राप्त करना तथा कार्य क्षेत्र को स्वच्छ और सुव्यवस्थित रखना इस कार्य का मुख्य उद्देश्य है।
सामग्री
- 1 से 1.5 फुट एंगल
- 6×6 शेड फ्रेम
- 16 फुट सफेद कोटी पत्रा
- हरी शेडनेट
- प्रोफाइल और सेल्फ स्क्रू
- GI एंगल (जोड़ाई व सपोर्ट हेतु)
- हुक, स्प्रिंग और वेल्डिंग सामग्री
कृती
एंगल सपोर्ट लगाए गए, फ्रेम तैयार की गई, पत्रे लगाए गए। प्रोफाइल लगाकर सेल्फ स्क्रू मारे गए। शेडनेट को स्प्रिंग से जोड़ा गया। GI एंगल और वेल्डिंग से सपोर्ट दिया गया तथा अंत में नीचे काले रंग की अच्छी कोटिंग की गई।
मुझे यह सीखाने
शेड निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री, माप, जोड़ाई और सुरक्षा के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
एंगल, पत्रे, प्रोफाइल और शेडनेट लगाने की प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से सीखा।
निरीक्षण
- सभी एंगल, पत्रे और शेडनेट ठीक प्रकार से लगे हुए पाए गए।
- जोड़ मजबूत है।
- सपोर्ट सही ढंग से लगाए गए हैं।
- शेड स्थिर और सुरक्षित है।
- कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक है।
निष्कर्ष
शेड निर्माण कार्य योजना के अनुसार सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ।
सभी सामग्री का सही उपयोग किया गया।
संरचना मजबूत, सुरक्षित और उपयोगी तैयार हुई।
भविष्य में उपयोग
इस शेड का उपयोग सामग्री भंडारण, वाहन पार्किंग, कार्य के लिए छाया तथा बारिश से सुरक्षा हेतु किया जा सकता है। इससे स्थान का बेहतर उपयोग होगा और संरचना लंबे समय तक टिकाऊ रहेगी।

डोम
प्रस्तावना
डोम का अर्थ गोल या अर्धगोलाकार संरचना होता है। प्राचीन काल से डोम प्रकार के निर्माण का उपयोग किया जाता रहा है। इस संरचना में मजबूती, आकर्षक डिजाइन तथा कम सामग्री में अधिक स्थान प्राप्त होता है।
उद्देश्य
- डोम संरचना की जानकारी प्राप्त करना।
- कम खर्च में मजबूत एवं आकर्षक संरचना तैयार करना।
- शैक्षणिक परियोजना के माध्यम से निर्माण तकनीक सीखना।
सर्वेक्षण
- प्राचीन वास्तुकला में डोम का उपयोग (मस्जिद, मंदिर, गॉथिक आर्किटेक्चर)।
- वर्तमान समय में उपयोग – ग्रीनहाउस, स्टोरेज, स्पोर्ट्स हॉल, अस्थायी घर।
- डोम के प्रकार – जियोडेसिक डोम, कंक्रीट डोम, बांस डोम।
सामग्री
- लोहे/स्टील के पाइप या बांस
- डोर / वेल्डिंग सामग्री
- प्लास्टिक शीट या टिन शीट (कवरिंग के लिए)
- स्क्रू, नट-बोल्ट, उपकरण (कटर, ड्रिल मशीन आदि)
कृती
- डिजाइन के अनुसार डोम की गोलाकार फ्रेम तैयार करना।
- पाइप/बांस को नट-बोल्ट या वेल्डिंग से जोड़ना।
- सभी जोड़ अच्छी तरह कसकर मजबूत करना।
- डोम पर कवर लगाना (प्लास्टिक शीट / टिन शीट)।
- अंत में मजबूती की जांच करना।
मुझे यर सीखाने को मिला
- डोम निर्माण की संरचना समझ में आई।
- टीमवर्क और माप-तोल का महत्व समझा।
निरीक्षण
- डोम हल्की सामग्री से भी मजबूत बनाया जा सकता है।
- हवा का दबाव और प्राकृतिक शक्तियाँ डोम पर समान रूप से फैलती हैं, इसलिए यह संरचना टिकाऊ होती है।
निष्कर्ष
डोम प्रकार की संरचना सस्ती, आकर्षक और मजबूत होने के कारण आधुनिक निर्माण में अत्यंत उपयोगी है।
भविष्य में उपयोग
- ग्रीनहाउस निर्माण
- अस्थायी घर या शेल्टर
- खेल मैदान और हॉल
- स्टोरेज एवं कार्यशालाएँ
सीपीएम चार्ट
| काम | समय |
| साफ -सफाई | 2 घंटे |
| मापन | 2 घंटे |
| सामग्री लाना | 2 घंटे |
| दिवार निर्माण | 5 घंटे |
| पुट्टी भरना | 3 घंटे |
| डोम पर कलर मरना | 16 घंटे |
| पेड को कटना | 2 घंटे |
| कोहे का पाईप घिसना | 1 घंटे |
| लोहे के पीइप को ओयल पेंट लगाना | 8 घंटे |
| कुल समय | 6 दिन |


ग्रील
प्रस्तावना
गेस्ट हाउस की सुरक्षा और मजबूत निर्माण के लिए ग्रिल लगाना एक महत्वपूर्ण कार्य है। इस प्रोजेक्ट में हमने तीन अलग-अलग मापों की ग्रिल का सर्वे किया, उनका कॉस्टिंग किया, आवश्यक सामग्री खरीदी और स्वयं ग्रिल तैयार की। इस प्रक्रिया के दौरान वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, माप लेना, फ्रेम बनाना, रेड ऑक्साइड प्राइमर और पेंटिंग जैसी तकनीकी कुशलताओं को प्रत्यक्ष रूप से सीखने और उपयोग करने का अवसर मिला।
सर्वे:
सबसे पहले गेस्ट हाउस की खिड़कियों के माप लिए गए। सर्वे में निम्नलिखित तीन अलग-अलग आकार की ग्रिल की आवश्यकता पाई गई:
- पहली ग्रिल: 6’ × 5’
- दूसरी ग्रिल: 4’ × 7’
- तीसरी ग्रिल: 2’ × 20”
इन मापों के आधार पर कॉस्टिंग की गई और उसी अनुसार सामग्री खरीदी गई।
उद्देश्य:
- गेस्ट हाउस के लिए आवश्यक आकार की मजबूत ग्रिल तैयार करना।
- गेस्ट हाउस को सुरक्षा प्रदान करना।
- धातु कार्य, वेल्डिंग, ग्राइंडिंग और फ्रेम फेब्रिकेशन कौशल का विकास करना।
- कम खर्च में अच्छी गुणवत्ता की ग्रिल बनाना।
सामग्री:
- 30 × 3 L-एंगल
- 2 × 2 स्क्वेयर जाली
- 10 × 10 स्क्वेयर बार
- वेल्डिंग रॉड
- ग्राइंडिंग डिस्क
- रेड ऑक्साइड प्राइमर
- काला ऑयल पेंट
आने वाली कठिनाइयाँ:
- तीन अलग-अलग माप होने के कारण प्रत्येक ग्रिल की फ्रेम अलग-अलग तरीके से मापनी पड़ी।
- स्क्वेयर बार का अंतर सटीक रखना समय-साध्य रहा।
- वेल्डिंग के बाद जॉइंट्स को स्मूथ करने के लिए अधिक ग्राइंडिंग करनी पड़ी।
- बड़ी ग्रिल को उठाना और सीधा रखना कठिन रहा।
निरीक्षण:
सभी ग्रिल मजबूत और सही माप में तैयार हुईं। L-एंगल और स्क्वेयर बार के उपयोग से ग्रिल की मजबूती काफी बढ़ी। पेंटिंग से ग्रिल को आकर्षक फिनिश मिली। पूरी प्रक्रिया में सटीक माप रखना सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा।
निष्कर्ष:
इस प्रोजेक्ट से हमें ग्रिल फेब्रिकेशन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, फ्रेम बनाना, प्राइमिंग और पेंटिंग का अच्छा ज्ञान हुआ। गेस्ट हाउस के लिए आवश्यक सभी ग्रिल सफलतापूर्वक तैयार की गईं और कम खर्च में उच्च गुणवत्ता प्राप्त हुई।
भविष्य में उपयोग:
भविष्य में इसी प्रकार की ग्रिल, दरवाजे, फेंसिंग या खिड़की संरचनाएँ बनाई जा सकती हैं। इन कौशलों का उपयोग कर स्वतंत्र कार्य या स्वयं का व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है।
कोस्टिंग
| अ. क्र. | मालाचे नाव | एकूण माल | दर | एकूण किंमत |
| 1 | 30X30x3 L angal | 210 kg | 70 | 14,700 |
| 2 | 10X10 [] BAR | 424 kg | 60 | 25,440 |
| 3 | 2X2 जाळी | [168] 2f | 22 | 3,696 |
| 4 | 30 x 3 पट्टी | 27 kg | 70 | 1,890 |
| 5 | रॉड पुडा | 3 | 400 | 1,200 |
| 6 | कटींग व्हिल | 20 | 25 | 500 |
| 7 | ग्रीडिंग व्हिल | 20 | 30 | 600 |
| 8 | पॉलिश व्हिल | 10 | 30 | 600 |
| 9 | कटींग व्हिल [14 in] | 2 | 200 | 400 |
| 10 | प्रायमर | 4 l | 240 | 960 |
| 11 | थीनर | 2 l | 120 | 240 |
| 12 | ब्रश | 4 | 40 | 160 |
| 13 | Electricity [10%] | 5,000 | ||
| 14 | मजुरी [15%] | 8,000 | ||
| 15 | TOTAL | 63,000 | ||

कोट
प्रस्तावना
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य एक मजबूत, टिकाऊ और आकर्षक लोहे का कॉट (Cot) तैयार करना था। इस कार्य में कॉट का डिज़ाइन, फ्रेम बनाना, ग्राइंडिंग, वेल्डिंग, रेड ऑक्साइड और पेंटिंग जैसी सभी प्रक्रियाएँ स्वयं करके मेटल फैब्रिकेशन के मूलभूत कौशल सीखना उद्देश्य था।
सर्वे
- बाज़ार में उपलब्ध मेटल ट्यूब की मोटाई, प्रकार और गुणवत्ता की जानकारी
- 1×2 स्क्वेयर ट्यूब और 1×1 सपोर्ट ट्यूब की मजबूती
- वेल्डिंग व ग्राइंडिंग के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता
- रेड ऑक्साइड और ऑयल पेंट की टिकाऊपन और कीमत
उद्देश्य
इस कॉट को बनाने का मुख्य उद्देश्य गेस्ट हाउस में उपयोग के लिए एक मजबूत, टिकाऊ और आरामदायक लोहे का कॉट तैयार करना था।
गेस्ट हाउस में फर्नीचर पर अधिक उपयोग और वजन पड़ता है, इसलिए स्क्वेयर ट्यूब का उपयोग कर मजबूती को प्राथमिकता दी गई।
कम मेंटेनेंस वाला, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाला फर्नीचर तैयार करना इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य था।
सामग्री
- 1” × 2” स्क्वेयर ट्यूब
- 1” × 1” स्क्वेयर ट्यूब
- 0.75” × 0.75” स्क्वेयर ट्यूब
- वेल्डिंग रॉड
- ग्राइंडिंग डिस्क
- पॉलिश व्हील
- रेड ऑक्साइड प्राइमर
- काला ऑयल पेंट
- पॉलिश पेपर
- लंबी (पुट्टी)
- कटिंग मशीन, वेल्डिंग मशीन
प्रक्रिया (कृती)
- सबसे पहले कॉट का पूरा डिज़ाइन तैयार किया गया।
- माप, फ्रेम का आकार और सपोर्ट की जगह निश्चित की गई।
- 1×2 स्क्वेयर ट्यूब से ऊपर की मुख्य फ्रेम बनाई गई।
- कोनों पर सही जॉइंट बनाकर वेल्डिंग की गई।
- मजबूती के लिए 1×1 स्क्वेयर ट्यूब के 2 सपोर्ट लगाए गए।
- सभी सपोर्ट समान दूरी पर फिट किए गए।
- पूरी फ्रेम की ग्राइंडिंग कर वेल्डिंग जॉइंट्स को स्मूथ किया गया।
- 15 इंच लंबाई के 1.5×1.5 ट्यूब के पाँव (Legs) लगाए गए।
- पाँवों की वेल्डिंग व ग्राइंडिंग की गई।
- पूरे कॉट को पॉलिश व्हील से पॉलिश किया गया।
- जंग से बचाने के लिए रेड ऑक्साइड लगाया गया।
- रेड ऑक्साइड सूखने के बाद जॉइंट पर पुट्टी लगाकर पॉलिश पेपर से घिसाई की गई।
- अंत में काला ऑयल पेंट लगाकर फाइनल फिनिशिंग दी गई।
आई हुई कठिनाइयाँ
- 1×1 सपोर्ट टुकड़ों का सटीक माप रखना
- वेल्डिंग के समय ट्यूब को सीधा रखना
- ग्राइंडिंग में सतह पूरी तरह सपाट करने में अधिक समय लगा
- रेड ऑक्साइड सूखने में देरी होने से आगे की प्रक्रिया लेट हुई
- पाँव और फ्रेम को एक ही लेवल में लाना चुनौतीपूर्ण था
निरीक्षण
- वेल्डिंग और ग्राइंडिंग से कॉट की मजबूती और फिनिशिंग अच्छी हुई।
- सभी सपोर्ट सही तरीके से लगाए जाने से फ्रेम मजबूत बना।
- रेड ऑक्साइड से धातु को जंग से सुरक्षा मिली।
- काले पेंट से कॉट आकर्षक और टिकाऊ बना।
निष्कर्ष
इस प्रोजेक्ट से मेटल फैब्रिकेशन के महत्वपूर्ण कौशल जैसे डिज़ाइनिंग, कटिंग, वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, पॉलिशिंग और पेंटिंग का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
एक मजबूत और गुणवत्तापूर्ण लोहे का कॉट सफलतापूर्वक तैयार किया गया।
भविष्य में उपयोग
- घर, हॉस्टल और गेस्ट हाउस के लिए टिकाऊ कॉट
- कस्टम फर्नीचर डिज़ाइन करने के लिए आधारभूत कौशल
- विभिन्न आकार के लोहे के फ्रेमवर्क बनाने के लिए तकनीकी ज्ञान
कॉस्टिंग :
| अ . क्र | मालाचे नाव | एकूण माल | दर | एकूण किंमत |
| 1 | 0.75 x 0.75 स्क्वेअर ट्यूब | 20′ | 25 | 500 |
| 2 | 1 x 2 स्क्वेअर ट्यूब | 360′ | 30 | 10,800 |
| 3 | 1 x 1स्क्वेअर ट्यूब | 100′ | 35 | 3,500 |
| 4 | 1/2 x 1/2 स्क्वेअर ट्यूब | 100′ | 40 | 4,000 |
| 5 | रॉड पुडा | 2 | 400 | 800 |
| 6 | कटींग व्हिल | 5 | 25 | 125 |
| 7 | ग्रीडिंग व्हिल | 5 | 30 | 150 |
| 8 | पॉलिश व्हिल | 3 | 30 | 150 |
| 9 | कटींग व्हिल [14 in] | 1 | 200 | 200 |
| 10 | लंबी | 2 kg | 500 | 1000 |
| 11 | प्रायमर | 2 L | 240 | 480 |
| 12 | थीनर | 2 L | 120 | 240 |
| 13 | काळा ऑईल पेंट | 2 L | 340 | 680 |
| 14 | रोलर | 1 | 50 | 50 |
| 15 | Electricity [10%] | 2,270 | ||
| 16 | मजुरी [15%] | 3,400 | ||
| 17 | total | 28,350 |

