प्रस्तावना
सेप्टी
इससे आगे के उपकरण खराब नहीं होते।
बिजली बहुत उपयोगी होती है, लेकिन अगर सही तरीके से इस्तेमाल न की जाए तो खतरनाक भी हो सकती है। इसलिए कुछ जरूरी सुरक्षा नियम (Safety Rules) और उपकरण (Safety Devices) होते हैं।
यह बिजली की सबसे जरूरी सुरक्षा होती है।
अगर किसी वायर में लीकेज या शॉर्ट सर्किट हो जाए, तो करेंट धरती (Earth) में चला जाता है, न कि इंसान के शरीर में।
इससे बिजली का झटका (Electric Shock) नहीं लगता।
फ्यूज़ एक सुरक्षा तार होता है जो ज्यादा करंट आने पर जल जाता है।
जैसे ही फ्यूज़ उड़ता है, बिजली कट जाती है — मतलब सिस्टम सुरक्षित।
यह फ्यूज़ की तरह काम करता है लेकिन ऑटोमैटिक होता है।
अगर शॉर्ट सर्किट या ओवरलोड हो, तो यह तुरंत ट्रिप होकर बिजली काट देता है।
इसे फिर से “ON” करके चालू किया जा सकता है।
यह इंसान को करंट लगने से बचाने वाला डिवाइस है।
अगर कहीं से करेंट लीक होकर शरीर में जाने लगता है, तो यह तुरंत बिजली काट देता है।
इसे अक्सर “लाइफ सेविंग स्विच” भी कहते हैं।
सभी तारों के ऊपर प्लास्टिक कवर होता है ताकि करेंट बाहर न आए।
इसे छेड़ना या काटना बहुत खतरनाक होता है।
कभी भी गीले हाथों से स्विच या प्लग न छुएँ।
बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर, या खुले तारों से दूर रहें।
उपकरण: मल्टीमीटर (Multimeter)
मल्टीमीटर को Voltage मोड (V) पर सेट किया जाता है।
जिस बिंदु के बीच वोल्टेज मापना है, वहाँ
लाल प्रॉब → पॉज़िटिव बिंदु
काला प्रॉब → नेगेटिव/ग्राउंड बिंदु
लगाया जाता है।
मीटर स्क्रीन पर वोल्टेज दिखाई देता है।
वोल्टेज दो प्रकार का हो सकता है:
AC Voltage (V~) → घर की बिजली
DC Voltage (V–) → बैटरी, चार्जर, सोलर आदि
उपकरण: मल्टीमीटर (A मोड) या Clamp Meter
मल्टीमीटर को Ampere (A) मोड पर सेट किया जाता है।
जिस तार से धारा गुजर रही है, उसके सीरिज में मल्टीमीटर लगाया जाता है।
यानी करंट को मल्टीमीटर के अंदर से होकर गुजरना पड़ता है।
सिर्फ तार को clamp के अंदर ले जाना होता है।
मीटर बिना तार काटे करंट माप लेता है।
V=I×RV = I \times RV=I×R
V = वोल्टेज
I = करंट
R = रेज़िस्टेंस


बोर्ड और फिटिंग लगाना
स्विच, सॉकेट, बल्ब होल्डर, पंखे का पॉइंट और MCB (मिनी ब्रेकर) लगाया जाता है।
सब वायरिंग को DB बॉक्स (Distribution Board) में कनेक्ट किया जाता है।
अर्थिंग (Earthing)
यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है
जमीन में एक अर्थ रॉड लगाई जाती है।
हरे रंग का अर्थ वायर पूरे सिस्टम से जोड़ा जाता है।
यह बिजली के झटकों और शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा देता है।
परीक्षण Testing
इलेक्ट्रिशियन वोल्टेज, कन्टीन्यूटी, और अर्थिंग की जांच करता है।
उसके बाद ही बिजली विभाग सप्लाई चालू करता है।
घर की मुख्य लाइन खुद कभी नहीं लगानी चाहिए।
गलत वायरिंग से आग, शॉक और बड़ा खतरा हो सकता है।
हमेशा प्रशिक्षित इलेक्ट्रिशियन या बिजली विभाग से ही काम कराएँ।
मेन सप्लाई + मीटर लगाना
बिजली विभाग से सर्विस लाइन आती है।
आपका मुख्य MCB + मीटर बॉक्स लगाया जाता है।


वायर का साईज
| उपकरण | वायर साइज | MCB |
|---|---|---|
| AC 1 Ton | 4 mm² | 20–25 Amp |
| AC 1.5 Ton | 6 mm² | 25–32 Amp |
| Geyser | 4 mm² | 25 Amp |
| Fridge | 2.5 mm² | 16 Amp |
| Washing Machine | 2.5 mm² | 16 Amp |
Main Line → 10 mm²
DB to Rooms → 2.5 mm² (Socket Circuit)
Lights + Fan → 1.5 mm²
Heavy Load (AC/Geyser) → 4 या 6 mm²
Earthing → 4 mm² (Green)
बायोगैस क्या है
बायोगैस एक प्राकृतिक गैस है जो जैविक कचरे (गोबर, रसोई कचरा, पौधे, मानव मल आदि) के सड़ने से बनती है। यह गैस मुख्य रूप से मीथेन (CH₄) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) से मिलकर बनी होती है।
बायोगैस कैसे बनती है?
बायोगैस एनेरोबिक डाइजेशन (ऑक्सीजन रहित वातावरण में सड़ने की प्रक्रिया) से मिलती है। इसके लिए एक बायोगैस प्लांट/डाइजेस्टर बनाया जाता है।
प्रक्रिया:
गोबर या जैविक कचरे को पानी में मिलाकर स्लरी बनाते हैं
इसे डाइजेस्टर टैंक में डालते हैं
20–40 दिन में बैक्टीरिया इसे तोड़कर गैस बनाते हैं
गैस ऊपर इकट्ठी होकर पाइप से चूल्हे या बिजली जनरेटर तक जाती है
बायोगैस के उपयोग
रसोई में खाना बनाने में (गैस चूल्हे जैसा)
बिजली उत्पादन
लाइट या गर्म पानी बनाने में
स्लरी से जैविक खाद (ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र)
बायोगैस के फायदे
सस्ती और नवीकरणीय ऊर्जा
पर्यावरण के अनुकूल
धुआँ नहीं बनता, स्वास्थ्य को नुकसान नहीं
गांवों में गैस सिलेंडर की जरूरत कम
खेतों के लिए बेहतरीन जैविक खाद मिलती है
किन चीज़ों से बायोगैस बनती है
गाय/भैंस/बकरी का गोबर
रसोई का कचरा
फसल अवशेष
गंदे पानी की सिल्ट

GREY WATER (ग्रे वॉटर
प्रस्तावना
आज के समय में पानी की कमी बढ़ती जा रही है। घरों में उपयोग के बाद निकलने वाला पानी जैसे नहाने का पानी, कपड़े धोने का पानी और बर्तन धोने का पानी ग्रे वॉटर कहलाता है। इस पानी को सीधे बर्बाद न करके यदि सही तरीके से शुद्ध किया जाए, तो इसका उपयोग खेती, बगीचे और पौधों को पानी देने के लिए किया जा सकता है।
विज्ञान आश्रम की इलेक्ट्रिक लैब में हमने ग्रे वॉटर को रिसायकल करके उसका उपयोग करने की जानकारी और प्रैक्टिकल कार्य सीखा।
उद्देश्य
उपयोग किए गए (अपशिष्ट) पानी का पुनः उपयोग करना
पानी की बचत करना
खेती और बागवानी के लिए पर्यावरण-अनुकूल उपाय सीखना
ग्रे वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम को प्रत्यक्ष रूप से तैयार करना
पानी के पुनः उपयोग की प्रक्रिया को समझना
प्रक्रिया कृति
घरों से निकलने वाले ग्रे वॉटर को अलग पाइप द्वारा एकत्र किया
बड़े गंदे कणों को रोकने के लिए जाली / फिल्टर लगाया
रेत, कंकड़ और कोयले का उपयोग करके फिल्टर यूनिट बनाई
पानी को धीरे-धीरे फिल्टर से प्रवाहित किया
शुद्ध हुआ पानी संग्रह टंकी में जमा किया
इस पानी का उपयोग खेती की फसलों, पेड़ों और बगीचे में किया
निरीक्षण
फिल्टर करने के बाद पानी अपेक्षाकृत साफ हो गया
दुर्गंध में कमी आई
पौधों को दिए गए पानी से कोई नुकसान नहीं दिखाई दिया
पानी की बर्बादी कम हुई
खेती के लिए यह पानी उपयोगी पाया गया
निष्कर्ष
ग्रे वॉटर रिसायकलिंग पानी की बचत करने वाली और पर्यावरण के लिए लाभदायक विधि है। विज्ञान आश्रम की इलेक्ट्रिक लैब में सीखी गई यह प्रणाली घर, स्कूल और खेतों में आसानी से अपनाई जा सकती है। ग्रे वॉटर के पुन उपयोग से पानी की आवश्यकता कम होती है और खेती के लिए एक अच्छा वैकल्पिक साधन उपलब्ध होता है

Hydro Marker और A-Frame द्वारा Contour Marking
प्रस्तावना
पानी का संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकना और खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए समतल रेखाओं (Contour Lines) का सही निर्धारण बहुत आवश्यक है। Contour Lines के माध्यम से पानी को भूमि में रोककर रखा जा सकता है और मिट्टी के बहाव को कम किया जा सकता है।
इस कार्य के लिए Hydro Marker और A-Frame जैसे सरल, सस्ते और प्रभावी उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
हमने इन उपकरणों को Electric Lab में सीखा और Social Point पर पहाड़ी क्षेत्र में वास्तविक रूप से marking करके practical अनुभव प्राप्त किया।
उद्देश्य
ढलान वाली भूमि पर समतल (level) रेखा ज्ञात करना
पानी को सही दिशा में रोकना
मिट्टी के कटाव को कम करना
खेती और जल संरक्षण के लिए सही marking करना
Hydro Marker और A-Frame के कार्य करने की प्रक्रिया को समझना
उपयोग किए गए उपकरण
A-Frame
Hydro Marker (पानी से भरी पारदर्शी पाइप)
रस्सी और वजन
लकड़ी/डंडे
Marker या पत्थर (marking के लिए)
कार्यविधि (Methodology
Frame का उपयोग
A आकार का लकड़ी का फ्रेम तैयार किया गया।
फ्रेम के बीच में रस्सी और वजन लटकाकर संतुलन निर्धारित किया गया।
ढलान वाली जमीन पर फ्रेम रखा गया।
जब रस्सी बीच में स्थिर हुई, तब दोनों पैर समान स्तर पर थे।
उस स्थान पर जमीन पर निशान लगाया गया।
इसी प्रकार आगे बढ़ते हुए पूरी contour line बनाई गई।
Hydro Marker का उपयोग
पारदर्शी पाइप को पानी से भरा गया।
पाइप के दोनों सिरों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया।
जहाँ दोनों सिरों पर पानी का स्तर समान हुआ, वहाँ जमीन समान ऊँचाई पर थी।
उस स्थान पर marking की गई।
इस प्रक्रिया को दोहराकर contour line तैयार की गई।
अवलोकन Observations
A-Frame से समतल रेखा सटीक रूप से प्राप्त हुई।
Hydro Marker ने लंबी दूरी पर भी सही level बताया।
पहाड़ी क्षेत्र में contour marking से पानी रोकने की सही दिशा समझ में आई।
मिट्टी के कटाव को रोकने के तरीके स्पष्ट हुए।
दोनों उपकरण बिना बिजली के प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं।
निष्कर्ष
Hydro Marker और A-Frame जल संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी उपकरण हैं। ये उपकरण सस्ते, सरल और पर्यावरण के अनुकूल हैं।
Electric Lab में प्राप्त ज्ञान और Social Point पर किए गए practical कार्य से जलसंधारण की वास्तविक समझ विकसित हुई।
यह तकनीक खेती, पहाड़ी क्षेत्रों और जल प्रबंधन के लिए बहुत लाभदायक है।
इलेक्ट्रिक इस्त्री
प्रस्तावना
मैं विज्ञान आश्रम में इलेक्ट्रिकल कोर्स करते समय घरेलू उपकरणों में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रिक इस्त्री (Iron) के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस प्रैक्टिकल में इस्त्री के विभिन्न भागों की पहचान करना, वायरिंग को समझना, खराबी ढूँढना तथा उसकी मरम्मत करना प्रत्यक्ष रूप से सीखने को मिला। इससे घरेलू इलेक्ट्रिक उपकरणों की कार्यप्रणाली समझने में सहायता मिली।
उद्देश्य
इलेक्ट्रिक इस्त्री के विभिन्न भागों की पहचान करना।
इस्त्री की वायरिंग एवं कनेक्शन को समझना।
इस्त्री में आने वाली सामान्य खराबियों को पहचानना।
इस्त्री की सुरक्षित एवं सही तरीके से मरम्मत करना।
प्रत्यक्ष प्रैक्टिकल द्वारा कौशल का विकास करना।
प्रक्रिया
सबसे पहले इलेक्ट्रिक सप्लाई बंद की।
इस्त्री खोलकर उसके भाग जैसे – हीटिंग एलिमेंट, थर्मोस्टैट, इंडिकेटर, वायर एवं प्लग की जाँच की।
खराब वायर या ढीले कनेक्शन की पहचान की।
आवश्यकतानुसार वायर बदले एवं सही कनेक्शन किए।
थर्मोस्टैट तथा हीटिंग एलिमेंट की जाँच की।
पुनः इस्त्री को सही ढंग से जोड़कर सप्लाई दी और परीक्षण किया।
अवलोकन
ढीले कनेक्शन के कारण इस्त्री चालू नहीं हो रही थी।
कुछ वायर जली हुई पाई गईं।
सही कनेक्शन करने के बाद इस्त्री ठीक से गर्म हुई।
इंडिकेटर लाइट सही प्रकार से चालू-बंद हो रही थी।
निष्कर्ष
इस प्रैक्टिकल से मुझे इलेक्ट्रिक इस्त्री की कार्यप्रणाली, उसके भाग, वायरिंग तथा मरम्मत के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। घरेलू इलेक्ट्रिक उपकरणों की सुरक्षित रूप से मरम्मत कैसे की जाती है, यह सीखने को मिला। भविष्य में ऐसे उपकरणों की छोटी-मोटी खराबियों को स्वयं ठीक करने का आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ।

गीजर (Geyser)
प्रस्तावना
आज के समय में घरेलू विद्युत उपकरणों का उपयोग बहुत अधिक बढ़ गया है। इन उपकरणों की सही जानकारी, वायरिंग की समझ और मरम्मत का कौशल होना आवश्यक है। विज्ञान आश्रम में इलेक्ट्रिक कोर्स के दौरान घरेलू उपकरणों के कार्य, उनके भाग, वायरिंग और रिपेयरिंग का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया।
उद्देश्य
घरेलू विद्युत उपकरणों की संरचना और कार्य को समझना
गीजर और अन्य उपकरणों के भागों की पहचान करना
सही वायरिंग पद्धति सीखना
खराबी पहचानना (Fault Finding)
उपकरणों की सुरक्षित रूप से मरम्मत करना
आत्मनिर्भरता और रोजगारोन्मुखी कौशल विकसित करना
गतिविधियाँ
विज्ञान आश्रम की कार्यशाला में प्रत्यक्ष प्रैक्टिकल किया गया
गीजर, पंखा, स्विच, प्लग, होल्डर आदि उपकरणों को खोलकर उनके भाग देखे
प्रत्येक उपकरण का वायरिंग डायग्राम समझा
खराब हिस्सों (हीटिंग एलिमेंट, थर्मोस्टैट, स्विच) को बदला गया
मल्टीमीटर की सहायता से टेस्टिंग की गई
सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए मरम्मत पूरी की गई
निरीक्षण
सही वायरिंग होने पर उपकरण सुचारू रूप से कार्य करता है
ढीले कनेक्शन से उपकरण में खराबी आती है
सही औज़ारों के उपयोग से मरम्मत आसान हो जाती है
सुरक्षा नियम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं
प्रत्यक्ष प्रैक्टिकल से समझ अधिक बेहतर होती है
निष्कर्ष
विज्ञान आश्रम में किए गए इलेक्ट्रिक कोर्स से घरेलू विद्युत उपकरणों की जानकारी, वायरिंग और रिपेयरिंग का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। गीजर और अन्य घरेलू उपकरणों की मरम्मत अब स्वयं की जा सकती है। इस प्रशिक्षण से तकनीकी कौशल में वृद्धि हुई है और भविष्य में रोजगार व स्व-रोजगार के लिए यह कोर्स अत्यंत उपयोगी है।

LED Repair (एलईडी लाइट रिपेयर
प्रस्तावना
मैंने इलेक्ट्रिक सेक्शन में LED लाइट रिपेयर का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण में हमें LED लाइट के कार्य करने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके बाद प्रैक्टिकल के माध्यम से खराब LED लाइट, बड़ी हैलोजन लाइट और स्ट्रीट लाइट की मरम्मत करना सिखाया गया। इस प्रशिक्षण से मुझे LED रिपेयर का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्तहुआ
उद्देश्य
इस प्रशिक्षण के उद्देश्य निम्नलिखित थे –
LED लाइट रिपेयर की जानकारी प्राप्त करना
खराब LED लाइट की जाँच करना
LED लाइट की मरम्मत करना
बड़ी हैलोजन और स्ट्रीट लाइट रिपेयर करना
LED लाइट के विभिन्न पार्ट्स की पहचान करना
मीटर द्वारा LED चेकिंग करना सीखना
प्रैक्टिकल अनुभव प्राप्त करना
उपयोग किए गए उपकरण
LED लाइट
स्क्रूड्राइवर
मल्टीमीटर
LED ड्राइवर
LED प्लेट
कैपेसिटर
रेसिस्टर
सेफ्टी ग्लव्स
कार्यविधि
इलेक्ट्रिक सेक्शन में LED रिपेयर क्लास अटेंड की
LED लाइट खोलकर उसके अंदर के पार्ट्स देखे
ड्राइवर, LED प्लेट, कैपेसिटर, रेसिस्टर आदि की पहचान की
खराब LED लाइट की जाँच की
मल्टीमीटर से LED की चेकिंग की
खराब पार्ट को निकालकर नया पार्ट लगाया
बड़ी हैलोजन लाइट की मरम्मत की
स्ट्रीट लाइट रिपेयर कर टेस्टिंग की
कार्य के दौरान सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया
निरीक्षण
इस प्रशिक्षण और प्रैक्टिकल कार्य का निरीक्षण निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा किया गया –
इलेक्ट्रिक सेक्शन के प्रशिक्षक
वरिष्ठ टेक्नीशियनवर्कशॉप इंस्ट्रक्टर
उन्होंने हमें सही मार्गदर्शन दिया और हमारी गलतियों को सुधारा।
निष्कर्ष
इस LED रिपेयर प्रशिक्षण से मुझे लाइट मरम्मत की संपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। LED लाइट के पार्ट्स, उनकी जाँच और रिपेयर प्रक्रिया को अच्छे से समझा। प्रैक्टिकल कार्य करने से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। भविष्य में इलेक्ट्रिक क्षेत्र में कार्य करते समय यह प्रशिक्षण मेरे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा।

बैटरी में पानी कैसे डालते हैं (साधारण तरीका
गाड़ी/इन्वर्टर बंद करें
सुरक्षा के लिए बैटरी को OFF करें।
बैटरी के ढक्कन खोजें
अधिकतर लेड-एसिड बैटरियों में 4–6 छोटे कैप (ढक्कन) होते हैं।
ढक्कन खोलें
कैप को धीरे से घुमाकर या ऊपर उठाकर खोलें।
लेवल मार्क देखें
बैटरी के अंदर MIN और MAX लेवल होता है।
पानी MIN से कम नहीं होना चाहिए और MAX से ऊपर नहीं जाना चाहिए।
केवल डिस्टिल्ड वॉटर (RO नहीं)
बैटरी में हमेशा डिस्टिल्ड वॉटर ही डालें।
धीरे-धीरे पानी डालें
फनल (चौड funnel) का उपयोग करें और MAX लेवल तक भरें — ज़्यादा नहीं।
ढक्कन वापस बंद करें
सभी कैप अच्छे से बंद करें ताकि एसिड बाहर न निकले।
बैटरी ON करें और जांचें
सब कुछ ठीक से काम कर रहा है या नहीं।

सीरिज (Series) कनेक्शन क्या होता है?
जब दो या ज़्यादा इलेक्ट्रिकल उपकरण / बैटरी / लाइटें एक के बाद एक जोड़ते हैं, तो उसे सीरिज कनेक्शन कहते हैं।
विशेषताएँ
करंट (Current) सभी में बराबर बहता है
वोल्टेज (Voltage) जुड़ जाते हैं (add)
एक डिवाइस खराब हुआ = पूरी लाइन बंद
Series का डायग्राम
+ -----[Bulb 1]-----[Bulb 2]-----[Bulb 3]----- -
उदाहरण
जैसे क्रिस्मस लाइट की पुरानी लड़ियाँ — एक बल्ब निकला तो सारी लाइटें बंद।
पैरेलल (Parallel) कनेक्शन क्या होता है?
जब सभी उपकरणों को अलग-अलग शाखा (branch) में एक ही पॉवर सोर्स से जोड़ा जाए, उसे पैरेलल कनेक्शन कहते हैं।
विशेषताएँ
वोल्टेज (Voltage) सबमें समान रहता है
करंट (Current) अलग-अलग बाँट जाता है
|---[Bulb 1]---| + ------|---[Bulb 2]---|------ - |---[Bulb 3]---|
उदाहरण
घर की सारी लाइटें और पंखे पैरेलल में ही जुड़े होते हैं।
सीरिज और पैरेलल में फर्क (Important Differences)
| पॉइंट | सीरिज (Series) | पैरेलल (Parallel) |
|---|---|---|
| करंट | सभी में बराबर | बाँट जाता है |
| वोल्टेज | जुड़ जाता है | सबमें समान |
| एक खराब हुआ | पूरी लाइन बंद | बाकी चलते रहेंगे |
| उपयोग | बैटरी पैक, LED स्ट्रिप | घर की वायरिंग, पंखे, लाइट्स |

इलेक्ट्रिकल में उपयोग होने वाले मुख्य वायर के प्रकार
सिंगल कोर वायर (Single Core Wire)
इसमें सिर्फ एक तांबे या एल्युमिनियम का तार होता है।
घरों की वायरिंग में सबसे ज्यादा उपयोग होता है।
फायदा: मजबूत, कम टूटने वाला, आसानी से इंस्टॉल होता है।
मल्टी कोर वायर (Multi Core Wire)
इसमें कई पतले-पतले तार एक साथ बंडल के रूप में होते हैं।
फ्लेक्सिबल होते हैं, झुकने वाले उपकरणों में उपयोग होता है।
उपयोग: पंखा, मिक्सर, आयरन, मोटर आदि।
फ्लेक्सिबल वायर (Flexible Wire)
मल्टीकोर तारों से बना होता है।
बेहद लचीला (flexible) होता है।
जहाँ मोड़ना/झुकाना पड़ता है वहाँ उपयोग होता है।
ट्विन वायर / लैम्प वायर (Twin Wire)
साथ में दो तार होते हैं — पॉजिटिव और नेगेटिव।
लैंप, चार्जर, छोटे उपकरणों में उपयोग।
थ्री कोर वायर (Three Core Wire)
इसमें 3 तार होते हैं:
- लाइव (L)
- न्यूट्रल (N)
- अर्थ (E)
फ्रिज, कूलर, पम्प, मोटर में उपयोग।
आर्मर्ड केबल (Armoured Cable – AC / XLPE Cable)
भारी और मजबूत केबल, लोहे की परत से ढकी।
जमीन के अंदर बिछाने (Underground) में उपयोग।
440V या उससे ज्यादा लोड के लिए।
कोएक्सियल केबल (Coaxial Cable)
टीवी, CCTV, इंटरनेट कनेक्शन के लिए।
फाइबर ऑप्टिक केबल (Fiber Optic Cable)
हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए।
इसमें धातु नहीं, कांच/प्लास्टिक फाइबर होते हैं।
हीट रेसिस्टेंट वायर (Heat Resistant Wire)
हीटर, गीजर, ओवन जैसे ज्यादा गर्मी वाले उपकरणों में।
सार (Summary)
| वायर का प्रकार | उपयोग |
|---|---|
| सिंगल कोर | घरेलू वायरिंग |
| मल्टीकोर/फ्लेक्स | उपकरणों में |
| थ्री कोर | मोटर/पम्प |
| आर्मर्ड केबल | जमीन में, हाई वोल्टेज |
| कोएक्सियल | टीवी/इंटरनेट |
| फाइबर ऑप्टिक | हाई स्पीड डेटा |
| हीट रेसिस्टेंट | हीट वाले उपकरण |

मिक्सर खराब होने पर आने वाली समस्याएँ और उनके समाधान
संभावित कारण
मिक्सर चालू ही नहीं होता
बिजली का प्लग ठीक से नहीं लगा
वायर कट/लूज़
ओवरलोड प्रोटेक्शन ट्रिप हुआ
मोटर खराब
समाधान
प्लग ठीक से लगाएँ
वायर ढीला हो तो बदलवाएँ
नीचे लगे ओवरलोड RESET बटन को दबाएँ
मोटर जली हो तो मरम्मत या मोटर बदलनी पड़ेगी
मिक्सर चलता है लेकिन आवाज़ ज़्यादा करता है
कारण
जार का बियरिंग ख़राब
ब्लेड ढीला
मोटर में धूल या ड्राई रबर
समाधान
बियरिंग ऑयलिंग करवाएँ या बियरिंग बदलें
ब्लेड कसें
मोटर साफ़ करवाएँ
मिक्सर जार लीक (Leak) करता है
कारण
जार की रबर गैस्केट खराब
ब्लेड फिटिंग ढीली
जार में क्रैक
समाधान
नई गैस्केट (रबर) लगाएँ
ब्लेड को ठीक से कसें
जार टूटा हो तो नया जार लें
ब्लेड घूम नहीं रहा / बहुत धीमे चलता है
कारण
मसाला/बैटर ज्यादा भर दिया
मोटर कमजोर/ओवरलोड
ब्लेड जाम (जंग या सूखा मसाला फंसा)
समाधान
जार थोड़ा खाली करें
RESET बटन दबाएँ
ब्लेड निकालकर गरम पानी में साफ़ करें
मिक्सर से जलने की बदबू आती है
कारण
भारी चीज़ पीसने से मोटर गर्म
मोटर की वायरिंग खराब
कॉइल जल रही
समाधान
तुरंत मिक्सर बंद करें और ठंडा होने दें
लगातार जलने की smell आए तो इलेक्ट्रिशियन या सर्विस सेंटर ले जाएँ
मिक्सर स्टार्ट होते ही रुक जाता है
कारण
ओवरलोड प्रोटेक्शन सक्रिय
जार सही से लॉक नहीं हुआ
कैपेसिटर खराब
समाधान
RESET बटन दबाएँ
जार को सही लॉक पोज़ीशन में लगाएँ
कैपेसिटर बदलना पड़ेगा
स्पीड नॉब घूमता नहीं / स्पीड बदलती नहीं
कारण
स्पीड कंट्रोलर खराब
कार्बन ब्रश घिस गए
समाधान
कंट्रोलर बदलवाएँ
कार्बन ब्रश नए लगाएँ (बहुत सस्ता आता है ₹30–₹50)
मिक्सर खराब होने से बचाने के टिप्स
कभी भी लगातार 3–4 मिनट से ज्यादा न चलाएँ
जार को अधिक भरकर न पीसें
रबर गैस्केट समय-समय पर बदलें
ब्लेड और जार को तुरंत धोकर सुखाएँ
हर 6 महीने में कार्बन ब्रश चेक कराएँ
मोटर बॉडी पर पानी न गिरे

इलेक्ट्रिक सोलर सिस्टम (Solar Energy
प्रस्तावना
आज के आधुनिक युग में ऊर्जा मानव जीवन की एक मूल आवश्यकता बन चुकी है। उद्योग, कृषि, परिवहन और घरेलू कार्य सभी ऊर्जा पर निर्भर हैं। कोयला, पेट्रोल, डीज़ल जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोत सीमित हैं और इनके उपयोग से वायु प्रदूषण बढ़ता है।
इसी कारण नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का महत्व बढ़ गया है। सौर ऊर्जा सूर्य के प्रकाश से प्राप्त होने वाली ऊर्जा है। यह स्वच्छ, सुरक्षित और कभी समाप्त न होने वाली ऊर्जा है। सोलर पैनल की सहायता से सूर्य के प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।
उद्देश्य
सौर ऊर्जा की जानकारी प्राप्त करना।सोलर सिस्टम के कार्य करने की प्रक्रिया समझना।प्रदूषण रहित ऊर्जा के महत्व को जानना।बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना।भविष्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना।
आवश्यक सामग्री
सोलर सिस्टम बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
सोलर पैनलचार्ज कंट्रोलरबैटरीइन्वर्टरवायर और कनेक्शन सामग्रीपैनल लगाने के लिए स्टैंड / फ्रेम
कार्यप्रणाली (कैसे काम करता है)
सोलर पैनल सूर्य की किरणों को ग्रहण करता है और उन्हें विद्युत ऊर्जा में बदलता है। यह बिजली चार्ज कंट्रोलर के माध्यम से बैटरी में संग्रहित होती है। बैटरी में जमा बिजली को इन्वर्टर की सहायता से घरेलू उपकरणों के उपयोग योग्य बनाया जाता है।
निरीक्षण
तेज धूप में बिजली उत्पादन अधिक होता है।सोलर पैनल को दक्षिण दिशा में लगाने से अधिक ऊर्जा मिलती है।साफ मौसम में उत्पादन अच्छा होता है, जबकि बादल या बारिश में कम।पैनल को साफ रखने से उसकी कार्यक्षमता बढ़ती है।
आई हुई कठिनाइयाँ
सोलर पैनल को कहाँ और कैसे लगाना है, इसकी सही जानकारी न होने के कारण प्रारंभ में कठिनाइयाँ आईं। सही दिशा (दक्षिण) और सही कोण तय करने में समस्या हुई।
मौसम बदलने पर, विशेषकर बरसात और बादल वाले दिनों में बिजली उत्पादन कम हो गया। सर्दियों में पैनल पर धूल जमने से उसकी कार्यक्षमता घट गई।
गलत वायरिंग के कारण शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है, इसलिए सही कनेक्शन और चार्ज कंट्रोलर का उपयोग आवश्यक होता है।
निष्कर्ष
सोलर सिस्टम एक स्वच्छ, सस्ता और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत है। इसके उपयोग से बिजली का खर्च कम होता है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचता। भविष्य में ऊर्जा संकट से बचने के लिए सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक उपयोग करना आवश्यक है।
उपाय / सुझाव
घर, स्कूल और कार्यालयों में सोलर पैनल लगाना चाहिए।
सरकार द्वारा दी जाने वाली सोलर योजनाओं का लाभ लेना चाहिए।
सोलर सिस्टम की सही जानकारी और प्रशिक्षण लेना चाहिए।
पैनल की नियमित सफाई और देखभाल करनी चाहिए।

वाटर फिल्टर कैसे ठीक करें: आसान और प्रभावी तरीका
जरूरत और आम समस्याएं
वाटर फिल्टर की जरूरत और आम समस्याएं
पानी को साफ और सुरक्षित बनाने के लिए फिल्टर जरूरी हैं
आम समस्याएं: पानी का धीमा बहाव, खराब स्वाद, रिसाव, आवाज़ आना
समस्या 1: पानी का धीमा बहाव
कारण: फिल्टर में जमी गंदगी या एयर लॉक
समाधान: फिल्टर कार्ट्रिज बदलें, एयर लॉक निकालें, पानी का प्रेशर जांचें
समस्या 2: पानी का खराब स्वाद या गंध
कारण: पुराना या खराब फिल्टर, बैक्टीरिया का विकास
समाधान: फिल्टर बदलें, सिरका और पानी से सिस्टम साफ करें
समस्या 3: वाटर फिल्टर से रिसाव
कारण: ढीले फिटिंग्स, टूटा हुआ हाउसिंग, खराब O-रिंग्स
समाधान: कनेक्शन कसें, खराब पार्ट्स बदलें, सही इंस्टॉलेशन करें
वाटर फिल्टर की मरम्मत के आसान कदम
पानी की सप्लाई बंद करें और टैंक खाली करें
फिल्टर हाउसिंग खोलें और पुराने फिल्टर निकालें
फिल्टर हाउसिंग को साबुन और पानी से साफ करें
नए फिल्टर लगाएं और कनेक्शन ठीक से करें
पानी चालू करें और सिस्टम को फ्लश करें
RO वाटर फिल्टर की सफाई और रखरखाव
हर 3 से 12 महीने में फिल्टर साफ या बदलें
Bleach या निर्माता के बताए केमिकल से सफाई कररिंग्स की स्थिति जांचें, जरूरत हो तो बदलें या चिकनाई करें
सावधानियां और सुझाव
नए फिल्टर पैक्ड रखें जब तक जरूरत न हो
हाथ धोकर या ग्लव्स पहनकर काम करें
साफ-सुथरे स्थान पर मरम्मत करें
अगर समस्या बनी रहे तो विशेषज्ञ से संपर्क करें
घरेलू मरम्मत के लिए उपयोगी उपकरण
फिल्टर रिंच (filter wrench)
सफाई के लिए सिरका या Bleach
नया फिल्टर कार्ट्रिज
रिंग्स और वाटरप्रूफ लुब्रिकेंट
निष्कर्ष: साफ पानी, स्वस्थ जीवन
नियमित रखरखाव से वाटर फिल्टर की उम्र बढ़ाएं
सही मरम्मत से पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करें
अपने परिवार को शुद्ध और सुरक्षित पानी पिलाएं
Water Filter के पार्ट्स – नाम, काम और कीमत
| क्र.सं. | पार्ट का नाम | क्या काम करता है | अनुमानित कीमत (₹) |
|---|---|---|---|
| 1 | फ़िल्टर हाउसिंग / कैनिस्टर (2 नग) | फ़िल्टर कैंडल रखने के लिए | ₹250 – ₹350 (एक) |
| 2 | सेडिमेंट फ़िल्टर कैंडल | पानी से गाद, मिट्टी, रेत निकालता है | ₹100 – ₹200 |
| 3 | कार्बन फ़िल्टर कैंडल | बदबू, रंग और क्लोरीन हटाता है | ₹150 – ₹300 |
| 4 | पानी की पाइप (सफेद) | पानी को एक पार्ट से दूसरे पार्ट तक ले जाती है | ₹30 – ₹50 / मीटर |
| 5 | इनलेट बॉल वाल्व (नीला हैंडल) | पानी चालू-बंद करने के लिए | ₹80 – ₹150 |
| 6 | एल्बो कनेक्टर (L आकार) | पाइप को मोड़ने के लिए | ₹10 – ₹20 (एक) |
| 7 | स्ट्रेट कनेक्टर (जॉइनर) | दो पाइप जोड़ने के लिए | ₹10 – ₹15 (एक) |
| 8 | टेफ्लॉन टेप (सफेद रोल) | थ्रेड से पानी लीक न हो इसलिए | ₹20 – ₹30 |
| 9 | हाउसिंग ओपनर / स्पैनर (नीला रिंग) | फ़िल्टर कैनिस्टर खोलने के लिए | ₹50 – ₹100 |
| 10 | मेटल स्टैंड / फ्रेम | पूरे फ़िल्टर सिस्टम को लगाने के लिए | ₹800 – ₹1500 |


सीसीटीवी कैमरे की विश्वसनीयता क्यों जरूरी है?
घर और ऑफिस की सुरक्षा के लिए 24/7 निगरानी अनिवार्य
खराब कैमरा सुरक्षा में छेद कर सकता है, जिससे नुकसान हो सकता है
कैमरे के मुख्य घटक जो दुरुस्तगी तय करते हैं
लेंस और सेंसर: हाई रेजोल्यूशन और क्लियर इमेजिंग के लिए
पावर सप्लाई: स्थिर और बिना रुकावट के काम करना जरूरी
कनेक्टिविटी: वायर्ड या वायरलेस, दोनों में स्थिर कनेक्शन आवश्यक
सही इंस्टॉलेशन से दुरुस्ती बढ़ती है
कैमरे का सही एंगल और पोजीशनिंग (360° पैन/टिल्ट फीचर)
मौसम और पर्यावरण के अनुसार आउटडोर कैमरे का चयन
पावर और नेटवर्क केबल्स की सुरक्षित व्यवस्था
तकनीकी फीचर्स जो कैमरे को दुरुस्त बनाते हैं
नाइट विजन: 40-65 फीट तक अंधेरे में स्पष्ट दृश्य
मोशन डिटेक्शन और अलर्ट्स: संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत सूचना
टू-वे ऑडियो: बातचीत और चेतावनी के लिए माइक्रोफोन और स्पीकर
विश्वसनीय ब्रांड और मॉडल के उदाहरण
Hikvision 1080p HD कैमरा: टिकाऊ, मौसम प्रतिरोधी, नाइट विजन के साथ
Tapo 3MP 2K स्मार्ट कैमरा: 360° व्यू, मोबाइल ऐप से कंट्रोल
Imou 5MP WiFi कैमरा: AI मोशन डिटेक्शन, क्लाउड स्टोरेज सपोर्ट
कैमरे की दुरुस्ती जांचने के आसान तरीके
वीडियो क्वालिटी और रेजोल्यूशन की नियमित जांच
नेटवर्क कनेक्शन की स्थिरता और रेंज टेस्ट
अलर्ट और रिकॉर्डिंग सिस्टम का परीक्षण
रखरखाव और सुरक्षा टिप्स
कैमरे की सफाई और लेंस की नियमित सफाई
सॉफ्टवेयर अपडेट और पासवर्ड सुरक्षा
बैकअप स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं का उपयोग
आम गलतियां जो कैमरे की दुरुस्ती को प्रभावित करती हैं
गलत इंस्टॉलेशन या कमजोर पावर सप्लाई
पुराना या सस्ता कैमरा चुनना
नेटवर्क कनेक्शन की अनदेखी
निष्कर्ष: दुरुस्त सीसीटीवी कैमरा = सुरक्षित घर और मन की शांति
सही कैमरा चुनें, सही तरीके से लगाएं और नियमित जांच करें
तकनीकी फीचर्स और रखरखाव पर ध्यान दें
सुरक्षा के लिए निवेश करें, क्योंकि सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होता
कास्टिंग
| साहित्य | नग | दर | किमत |
| 3 +1 केबल | 25 मीटर | 20 | 500 |
| मनी | 50 | 3 | 150 |
| BNC | 2 | 40 | 80 |
| POWER | 1 | 30 | 30 |
| स्क्रु | 10 | 2 | 20 |
| केबल टाय | 10 | 2 | 20 |
| instulation tape | 1 | 10 | 10 |
| बुलेट कॅमेरा 5 MP | 1 | 1250 | 1450 |
| SCQUIRBOX | 1 | 80 | 80 |
| CCLEP | 10 | 10 | 5 |
| मजुरी | 300 | 300 | |
| TOTAL PRICE | 7650 |

धू-विरोधी चूल्हा: परंपरा, विज्ञान और आध्यात्मिकता का संगम
धू-विरोधी चूल्हा क्या है?
पारंपरिक मिट्टी का चूल्हा जो धुआं कम करता है
लकड़ी जलाने की प्रक्रिया में धुएं का प्रभावी नियंत्रण
ग्रामीण और प्राकृतिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा
धू-विरोधी चूल्हा कैसे बनता है?
मिट्टी, गोबर और जल का मिश्रण बनाकर मजबूत संरचना तैयार करना
चूल्हे के आकार और निकास मार्ग का विशेष डिजाइन जो धुएं को बाहर निकालता है
आग जलाने के लिए उचित वेंटिलेशन और हवा का प्रवाह सुनिश्चित करना
[image] मिट्टी के चूल्हे का निर्माण करते हुए ग्रामीण महिला, हाथों में गोबर और मिट्टी
धू-विरोधी चूल्हे के आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभ
चूल्हे की आग से निकलने वाला धुआं कम होने से घर का वातावरण शुद्ध रहता है
खाना पकाने के दौरान सकारात्मक ऊर्जा और देवताओं की उपस्थिति का अनुभव
खाना स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक बनता है क्योंकि यह प्राकृतिक ऊर्जा से भरपूर होता है
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से धू-विरोधी चूल्हा
धुएं के प्रदूषण को कम करने में मददगार
चूल्हे की आग से निकलने वाली गर्मी का बेहतर उपयोग
पर्यावरण के अनुकूल, बिना रासायनिक प्रदूषण के खाना पकाना
धू-विरोधी चूल्हा और सांस्कृतिक महत्व
भारतीय ग्रामीण जीवन की आत्मा और परंपरा का प्रतीक
महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा और परिवार के लिए शुद्ध भोजन
धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों में चूल्हे की भूमिका
[image] पारंपरिक चूल्हे पर खाना पकाते हुए परिवार, आसपास खुशहाल वातावरण
आधुनिक जीवन में धू-विरोधी चूल्हे की प्रासंगिकता
LPG और इलेक्ट्रिक चूल्हों के मुकाबले प्राकृतिक और सस्ता विकल्प
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के लिए आवश्यक
ग्रामीण पुनरुद्धार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
निष्कर्ष: धू-विरोधी चूल्हा – परंपरा से भविष्य की ओर
यह चूल्हा न केवल खाना पकाने का माध्यम है, बल्कि जीवन को शुद्ध और स्वस्थ बनाने का तरीका है
हमें इसे संरक्षित कर, सीख कर और अपनाकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए
चलिए, धू-विरोधी चूल्हे की महत्ता को समझें और इसे पुनर्जीवित करें
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GENERATOR (जनरेटर)
तराने आश्रम में बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आश्रम के सभी दैनिक कार्य सुचारु रूप से चलते रहें, इसके लिए जनरेटर की सुविधा उपलब्ध है। जनरेटर का सही उपयोग करने के लिए उसकी संरचना, कार्यप्रणाली, चालू–बंद करने की प्रक्रिया तथा उसकी देखभाल की जानकारी होना आवश्यक है।
इस उद्देश्य से आश्रम में लगे जनरेटर की विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई, उसे चालू–बंद करने की प्रक्रिया को देखा गया तथा ऑयल बदलने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव लिया गया। आश्रम में जनरेटर को चालू–बंद करने का कॉन्ट्रैक्ट मेरा और भगवान का है, इसलिए इस कार्य की जिम्मेदारी को सही ढंग से समझना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
उद्देश्य
आश्रम में लगे जनरेटर की कार्यप्रणाली को समझना।
जनरेटर को चालू–बंद करने की सही और सुरक्षित विधि सीखना।
जनरेटर की नियमित देखभाल तथा ऑयल बदलने की प्रक्रिया को जानना।
जनरेटर का उपयोग करते समय पालन किए जाने वाले सुरक्षा नियमों की जानकारी प्राप्त करना।
कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार जिम्मेदारी को सही ढंग से निभाने के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त करना।
क्रियाविधि (कृती)
जनरेटर के मुख्य भागों की जानकारी प्राप्त की गई, जैसे – इंजन, पैनल, फ्यूल टैंक और अल्टरनेटर।
जनरेटर चालू करने की प्रक्रिया:
फ्यूल की जांच करना।
ऑयल लेवल की जांच करना।
मेन स्विच बंद (OFF) रखकर जनरेटर स्टार्ट करना।
RPM स्थिर होने के बाद लोड देना।
जनरेटर बंद करने की प्रक्रिया:
पहले लोड हटाना (लोड ऑफ करना)।
जनरेटर को कुछ समय ठंडा होने देना।
मुख्य स्विच बंद करके जनरेटर बंद करना।
ऑयल चेंज की प्रक्रिया:
पुराना ऑयल निकालना।
ऑयल फिल्टर की जांच करना।
नया ऑयल भरना।
सुरक्षा नियमों का पालन कैसे करना है, यह भी देखा गया, जैसे – दस्ताने पहनना, आग से बचाव के नियम, उचित वेंटिलेशन आदि।
निरीक्षण / मार्गदर्शन
जनरेटर ऑपरेटर / तकनीकी कर्मचारी के मार्गदर्शन में सभी प्रक्रियाओं का अवलोकन किया गया। उन्होंने जनरेटर की क्षमता, अधिक लोड से बचाव, देखभाल का समय-निर्धारण तथा ऑयल बदलने के समय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कॉन्ट्रैक्ट की जिम्मेदारी सही ढंग से निभाने के लिए आवश्यक निर्देश भी उन्होंने दिए।
निष्कर्ष
इस प्रक्रिया के माध्यम से जनरेटर की संरचना, उसे चालू–बंद करने की सही विधि, उसकी देखभाल और ऑयल बदलने की प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। नियमित जांच और सही तरीके से संचालन करने पर जनरेटर लंबे समय तक सही ढंग से कार्य करता है और आश्रम की बिजली आपूर्ति को निरंतर बनाए रखने में सहायता करता है।
चूँकि आश्रम में जनरेटर को चालू–बंद करने का कॉन्ट्रैक्ट मेरा और भगवान का है, इसलिए यह जानकारी भविष्य के कार्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई।

मोटर रिवाइंडिंग (Motor Rewinding
इलेक्ट्रिक मोटर का उपयोग उद्योगों, कृषि कार्यों, घरेलू उपकरणों तथा कारखानों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। लंबे समय तक उपयोग, ओवरलोड, वोल्टेज की समस्या, अधिक गर्म होना (ओवरहीटिंग) या इन्सुलेशन खराब होने के कारण मोटर की वाइंडिंग जल जाती है। ऐसी स्थिति में मोटर को बदलने के बजाय रिवाइंडिंग करके उसे दोबारा कार्यक्षम बनाया जा सकता है।
उद्देश्य
मोटर रिवाइंडिंग का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
खराब या जली हुई वाइंडिंग को हटाकर नई वाइंडिंग लगाकर मोटर को पुनः कार्यक्षम बनाना।
मोटर की आयु बढ़ाना।
नई मोटर खरीदने के खर्च को बचाना।
मोटर की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता पुनः प्राप्त करना।
क्रियाविधि (कार्य प्रक्रिया)
मोटर को डिसमेंटल करना
मोटर का कवर, रोटर और स्टेटर को अलग करना।
पुरानी वाइंडिंग निकालना
जली हुई कॉपर वायर, इन्सुलेशन और स्लॉट वेजेस को निकालना।
सफाई
स्टेटर स्लॉट की अच्छी तरह सफाई करना और बर्निशिंग करना।
स्लॉट इन्सुलेशन लगाना
नया इन्सुलेशन पेपर या मायलर लगाना।
नई कॉइल बनाना
आवश्यक गेज की कॉपर वायर से नई कॉइल तैयार करना।
कॉइल को स्टेटर में लगाना
सही क्रम और उचित तनाव के साथ कॉइल को स्टेटर में फिट करना।
कनेक्शन और जॉइंट करना
स्टार या डेल्टा कनेक्शन के अनुसार जॉइंट बनाना।
वार्निश (Varnish) और बेकिंग
इन्सुलेशन को मजबूत करने के लिए वार्निश करना और बेकिंग प्रक्रिया करना।
मोटर को पुनः असेंबल करना
सभी हिस्सों को वापस सही तरीके से जोड़ना।
टेस्टिंग
नो-लोड टेस्ट करना।
वाइब्रेशन, करंट और वोल्टेज की जांच करना।
निरीक्षण
रिवाइंडिंग के बाद निम्नलिखित बातों की जांच की जाती है:
मोटर सही दिशा और गति से घूम रही है या नहीं।
करंट ड्रॉ मानकों के अनुसार है या नहीं।
मोटर अधिक गर्म तो नहीं हो रही।
कंपन (Vibration) या असामान्य आवाज तो नहीं आ रही।
इन्सुलेशन रेजिस्टेंस (मेगर वैल्यू) सही है या नहीं।
निष्कर्ष
मोटर रिवाइंडिंग एक कुशल और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसकी सहायता से खराब मोटर को फिर से नई जैसी कार्यक्षम बनाया जा सकता है। सही सामग्री, उचित गेज, अच्छी इन्सुलेशन और सही तकनीकी प्रक्रिया का पालन करने से मोटर की आयु बढ़ती है, खर्च कम होता है और उद्योग की कार्यक्षमता में सुधार होता है।

हाइड्रोमार्कर
प्रस्तावना
हाइड्रोमार्कर एक सरल उपकरण है जिसका उपयोग वर्षा जल या पानी के स्तर को मापने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग मौसम निरीक्षण, कृषि तथा पर्यावरण अध्ययन में किया जाता है। विद्यालयीन प्रयोगों में हाइड्रोमार्कर को साधारण सामग्री से आसानी से बनाया जा सकता है।
प्रक्रिया
एक पारदर्शी बोतल लें।
बोतल के ऊपरी हिस्से को काटकर उसे उल्टा करके फ़नल की तरह फिट करें।
बोतल पर सेंटीमीटर में माप की निशानियाँ बनाएं।
खुले स्थान पर बोतल को स्थिर रखें।
वर्षा होने के बाद बोतल में पानी की ऊँचाई दर्ज करें।
उद्देश्य
मौसम में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करना।
वर्षा की मात्रा मापना।
पानी के स्तर का निरीक्षण करना।
विद्यार्थियों में मापन और अवलोकन की आदत विकसित करना।
अवलोकन
प्रतिदिन या प्रत्येक वर्षा के बाद पानी के स्तर की जाँच की गई।
अधिक वर्षा वाले दिनों में पानी का स्तर अधिक पाया गया।
कम वर्षा होने पर पानी का स्तर कम दर्ज किया गया।
निष्कर्ष
हाइड्रोमार्कर की सहायता से वर्षा की मात्रा को सरल तरीके से मापा जा सकता है। यह उपकरण सस्ता, उपयोगी और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे मौसम निरीक्षण की मूलभूत समझ विकसित होती है।
प्लेन टेबल
प्रस्तावना
प्लेन टेबल सर्वेक्षण क्षेत्र में ही नक्शा बनाने की एक सरल एवं तेज़ विधि है। इस विधि में प्लेन टेबल, एलिडेड, प्लंब बॉब, स्पिरिट लेवल आदि उपकरणों का उपयोग करके प्रत्यक्ष माप लिए जाते हैं और उसी समय नक्शे पर प्रविष्टियाँ की जाती हैं।
उद्देश्य
प्लेन टेबल सर्वेक्षण की जानकारी प्राप्त करना।
क्षेत्र में स्थित वस्तुओं की सही स्थिति को नक्शे पर दर्शाना।
रेडिएशन / इंटरसेक्शन विधि से सर्वे करना।
भूमि माप और नक्शा तैयार करने के लिए प्लेन टेबल सर्वे एक सरल और उपयोगी विधि है। इस विधि में वास्तविक स्थल पर ही माप लेकर नक्शा तैयार किया जा सकता है। विज्ञान आश्रम के गर्ल्स हॉस्टल के सामने की जगह को मापने के लिए प्लेन टेबल का उपयोग किया गया।
निष्कर्ष
प्लेन टेबल सर्वे द्वारा गर्ल्स हॉस्टल के सामने की जगह को सटीक रूप से मापा गया। यह विधि सरल, सस्ती और प्रत्यक्ष नक्शा बनाने के लिए उपयोगी है। कृषि, निर्माण तथा भूमि नियोजन के लिए प्लेन टेबल अत्यंत उपयोगी है।
भूमि माप और नक्शा तैयार करने के लिए प्लेन टेबल सर्वे एक सरल और उपयोगी विधि है। इस विधि में वास्तविक स्थल पर ही माप लेकर नक्शा तैयार किया जा सकता है। विज्ञान आश्रम के गर्ल्स हॉस्टल के सामने की जगह को मापने के लिए प्लेन टेबल का उपयोग किया गया।
प्लेन टेबल की सहायता से स्थान की लंबाई और चौड़ाई मापना।
मापी गई जगह का स्केच / नक्शा तैयार करना।
प्रत्यक्ष सर्वे का अनुभव प्राप्त करना।
कृषि और निर्माण के लिए माप के महत्व को समझना।
क्रिया
प्लेन टेबल को उचित स्थान पर स्थिर किया गया।
लेवलिंग करके टेबल को समतल किया गया।
कागज़ को टेबल पर ठीक से रखकर क्लिप से कसकर पकड़ा गया।
एलिडेड की सहायता से कोनों को निर्धारित किया गया।
टेप की मदद से स्थान की लंबाई और चौड़ाई मापी गई।
माप के अनुसार स्केल का उपयोग करके कागज़ पर नक्शा बनाया गया।
निरीक्षण
जगह समतल होने के कारण माप करना आसान हुआ।
लंबाई और चौड़ाई सटीक रूप से मापी जा सकी।
वास्तविक स्थान का आकार नक्शे पर स्पष्ट दिखाई दिया।
माप करते समय टीमवर्क के महत्व का अनुभव हुआ।

अर्थिंग क्या होती है
अर्थिंग का मतलब है बिजली के उपकरण की अतिरिक्त/खराब करंट को ज़मीन में भेज देना, ताकि
इंसान को करंट न लगे
उपकरण खराब न हों
शॉर्ट सर्किट से आग न लगे
अर्थिंग प्रैक्टिकल में कैसे बनाते हैं स्टेप-बाय-स्टेप
गड्ढा खोदना
ज़मीन में लगभग 6–8 फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है
अर्थिंग इलेक्ट्रोड डालना
गड्ढे में इनमें से कोई एक डाला जाता है:
तांबे (Copper) की प्लेट/रॉड
GI (लोहे) की प्लेट/पाइप
नमक और कोयला डालना
प्लेट पाइप के चारों तरफ नमक
कोयला (चारकोल)
डाला जाता है
इससे ज़मीन की रेज़िस्टेंस कम होती है
पानी डालना
समय-समय पर पानी डाला जाता है
ताकि मिट्टी नम रहे और अर्थिंग सही काम करे
अर्थ वायर जोड़ना
तांबे या GI की अर्थ वायर
प्लेट/पाइप से जोड़कर
घर के डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड तक ले जाते हैं
अर्थिंग के प्रकार Types of Earthing
प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing)
तांबे या GI की प्लेट
घरों और फैक्ट्रियों में आम
सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है
पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing)
GI पाइप ज़मीन में डाला जाता है
सस्ती और टिकाऊ
घरों में सबसे लोकप्रिय
रॉड अर्थिंग (Rod Earthing)
तांबे या GI की रॉड
कम जगह में उपयोग
टावर, पोल आदि में
स्ट्रिप / वायर अर्थिंग
तांबे या GI की पट्टी
बड़े पावर सिस्टम में
सबस्टेशन में
अर्थिंग क्यों ज़रूरी है
करंट से सुरक्षा
आग लगने से बचाव
TV, Fridge, AC सुरक्षित
जान की सुरक्षा

गेस्ट हॉस्टल वायरिंग प्रोजेक्ट
प्रस्तावना
मैं विज्ञान आश्रम में इलेक्ट्रिकल कोर्स कर रहा/रही था/थी, उस दौरान मैंने गेस्ट हॉस्टल वायरिंग को एक प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट के रूप में चुना। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यह सीखना था कि किसी वास्तविक इमारत में पूरी वायरिंग सिस्टम को कैसे डिज़ाइन, इंस्टॉल और सुरक्षित रूप से चालू किया जाता है
इस प्रोजेक्ट में शुरुआत से लेकर अंत तक सभी कार्य हमने स्वयं किए, जैसे – डायग्राम बनाना, मार्किंग करना, मटेरियल खरीदना, वायरिंग करना, स्विच बोर्ड भरना, MCB लगाना और अर्थिंग करना। इससे हमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ज्ञान भी प्राप्त हुआ
उद्देश्य
गेस्ट हॉस्टल के लिए उपयुक्त वायरिंग प्लान तैयार करना
डायग्राम के अनुसार साइट पर कार्य करना सीखना
सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए इलेक्ट्रिकल कार्य करना
मार्किंग, PVC पट्टी फिटिंग और वायरिंग का अनुभव प्राप्त करना
स्विच बोर्ड, MCB बोर्ड और अर्थिंग कनेक्शन करना सीखना
सही मटेरियल का चयन और खरीद की जानकारी प्राप्त करना
खर्च का अनुमान (आर्थिक योजना) लगाना सीखना
टीमवर्क, टाइम मैनेजमेंट और जिम्मेदारी से काम करना सीखना
कार्यविधि प्रक्रिया
सबसे पहले गेस्ट हॉस्टल का निरीक्षण किया गया
लाइट पॉइंट, फैन पॉइंट, प्लग पॉइंट और स्विच बोर्ड की जगह तय कर डायग्राम बनाया गया
डायग्राम के अनुसार लेज़र मशीन से सटीक मार्किंग की गई
मार्किंग के बाद PVC पट्टी की फिटिंग की गई
आवश्यक मटेरियल की सूची तैयार की गई
गाँव जाकर वायर, स्विच, सॉकेट, MCB, बोर्ड, पट्टी आदि मटेरियल खरीदा गया
खरीद के समय सही गुणवत्ता और सही दाम का चयन करना सीखा
पट्टी में सही साइज की वायर डालकर वायरिंग पूरी की गई
स्विच बोर्ड भरे गए और सभी कनेक्शन सही तरीके से किए गए
MCB बोर्ड भरना और उसका कनेक्शन करना सीखा
पूरी वायरिंग के बाद अर्थिंग की गई
अंत में सभी पॉइंट्स की जाँच कर टेस्टिंग की गई
निरीक्षण
| सामान का नाम | क्या काम करता है | कीमत (₹) |
|---|---|---|
| अर्थिंग पाउडर | ज़मीन में बिजली का करंट सुरक्षित तरीके से फैलाने में मदद करता है | ₹100 |
| अर्थिंग रॉड | ज़मीन के अंदर डाली जाने वाली धातु की रॉड, जिससे अर्थिंग होती है | ₹380 |
| अर्थिंग टार | रॉड को जंग से बचाने और कनेक्शन मज़बूत रखने के लिए | ₹80….कुल खर्च ₹560 |

डायग्राम होने के कारण काम योजनाबद्ध और आसान हुआ
लेज़र मार्किंग से काम बहुत सटीक और सीधा हुआ
सही तरीके से पट्टी फिटिंग होने से वायरिंग सुरक्षित रही
अच्छी गुणवत्ता के मटेरियल से वायरिंग टिकाऊ बनी
MCB के कारण सुरक्षा में वृद्धि हुई
अर्थिंग से विद्युत दुर्घटना का खतरा कम हुआ
टीम में काम करने से समय का सही उपयोग हुआ
प्रैक्टिकल कार्य करने से आत्मविश्वास बढ़ा
निष्कर्ष
इस गेस्ट हॉस्टल वायरिंग प्रोजेक्ट से मुझे इलेक्ट्रिकल क्षेत्र का महत्वपूर्ण प्रैक्टिकल ज्ञान प्राप्त हुआ। मैंने मार्किंग, पट्टी फिटिंग, वायरिंग, स्विच बोर्ड भरना, MCB लगाना और अर्थिंग जैसे सभी कार्य स्वयं करना सीखा
इसके साथ-साथ मटेरियल खरीद, खर्च का अनुमान (आर्थिक ज्ञान), टाइम मैनेजमेंट और टीमवर्क जैसे कौशलों का भी विकास हुआ। यह प्रोजेक्ट मेरे भविष्य के इलेक्ट्रिकल कार्यों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा और मुझे एक जिम्मेदार एवं कुशल इलेक्ट्रिशियन बनने में मदद करेगा
उद्देश्य
गेस्ट हॉस्टल के लिए सही वायरिंग प्लान बनाना
डायग्राम के अनुसार काम करना सीखना
सेफ्टी नियमों के अनुसार इलेक्ट्रिकल काम करना
मार्किंग और PVC पट्टी फिटिंग करना सीखना
लाइट, फैन और प्लग पॉइंट की वायरिंग करना
स्विच बोर्ड और MCB बोर्ड कनेक्शन करना
अर्थिंग का महत्व समझना और करना
मटेरियल का सही चयन करना सीखना
टीम में काम करना और समय का सही उपयोग करना
कार्यविधि प्रक्रिया
सबसे पहले गेस्ट हॉस्टल की साइट देखी गई
लाइट, फैन, प्लग और स्विच बोर्ड की जगह तय की गई
इसके अनुसार वायरिंग का डायग्राम बनाया गया
लेज़र मशीन से दीवार पर सही मार्किंग की गई
मार्किंग के बाद PVC पट्टी फिट की गई
आवश्यक मटेरियल की लिस्ट बनाई गई
बाजार से वायर, स्विच, सॉकेट, MCB, बोर्ड आदि खरीदे गए
पट्टी में सही साइज की वायर डाली गई
सभी स्विच बोर्ड भरे गए
MCB बोर्ड लगाया और कनेक्शन किए
पूरी वायरिंग के बाद अर्थिंग की गई
अंत में सभी पॉइंट्स की टेस्टिंग की गई
गेस्ट हॉस्टल वायरिंग की कॉस्टिंग
| क्र.सं. | मटेरियल का नाम | मात्रा (नग/मीटर) | दर (₹) | कुल कीमत (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | एंगल होल्डर | 27 | 30 | 810 |
| 2 | 16 एम्पियर सॉकेट | 3 | 145 | 435 |
| 3 | 16 एम्पियर स्विच | 3 | 75 | 225 |
| 4 | 6 एम्पियर सॉकेट | 24 | 45 | 1080 |
| 5 | 6 एम्पियर स्विच | 44 | 22 | 968 |
| 6 | सीलिंग रोज़ | 6 | 20 | 120 |
| 7 | ज़ीरो बल्ब | 3 | 40 | 120 |
| 8 | ट्यूब लाइट | 8 | 200 | 1600 |
| 9 | एडॉप्टर | 12 | 20 | 240 |
| 10 | रेगुलेटर | 5 | 280 | 1400 |
| 11 | इंसुलेशन टेप | 10 | 10 | 100 |
| 12 | 3 मॉड्यूल बॉक्स | 2 | 60 | 120 |
| 13 | 2 मॉड्यूल बॉक्स | 3 | 80 | 240 |
| 14 | 6 मॉड्यूल बॉक्स | 10 | 120 | 1200 |
| 15 | 16 एम्पियर मॉड्यूल (S.S) | 2 | 160 | 320 |
| 16 | MCB सिंगल पोल | 3 | 150 | 450 |
| 17 | MCB 40 एम्पियर | 1 | 590 | 590 |
| 18 | फ्यूज़ | 16 | 20 | 320 |
| 19 | D-हुक | 6 | 40 | 240 |
| 20 | स्क्वेयर बॉक्स | 32 | 10 | 320 |
| 21 | रॉवल प्लग | 21 | 15 | 315 |
| 22 | बॉटम होल्डर | 4 | 30 | 120 |
| 23 | टाई | 1 | 160 | 160 |
| 24 | 2.5 स्क्वे. मि. वायर (लाल व काला) | 2 रोल | 3565 | 7130 |
| 25 | 1 स्क्वे. मि. वायर (लाल, काला, हरा) | 3 रोल | 1640 | 4920 |
| 26 | 1 स्क्वे. मि. पीली वायर (45 मी.) | 1 | 820 | 820 |
| 27 | इंडिकेटर | 3 | 80 | 240 |
| 28 | 0.75 इंच PVC पट्टी | 17 | 45 | 765 |
| 29 | 1 इंच PVC पट्टी | 70 | 50 | 3500 |
| 30 | 35×8 PVC पट्टी | 10 | 80 | 800 |
| 31 | 3 मॉड्यूल प्लेट | 2 | 65 | 130 |
| 32 | 6 मॉड्यूल प्लेट | 10 | 135 | 1350 |
| 33 | 12 मॉड्यूल प्लेट | 3 | 230 | 690 |
| 34 | 12 मॉड्यूल सरफेस बॉक्स | 3 | 150 | 450 |
| 35 | अर्थिंग रॉड | 1 | 380 | 380 |
| 36 | अर्थिंग पाउडर | 1 | 100 | 100 |
| 37 | अर्थिंग टार | 1 | 80 | 80 |
कुल मटेरियल खर्च = ₹ 32,848 /
निष्कर्ष कॉस्टिंग
इस गेस्ट हॉस्टल वायरिंग प्रोजेक्ट के लिए कुल ₹ 32,848 का मटेरियल खर्च आया। इस कॉस्टिंग से हमें मटेरियल का सही चयन, बाजार भाव की जानकारी और वायरिंग कार्य के लिए अनुमान (Estimation) बनाना सीखने को मिला। यह ज्ञान ITI परीक्षा और भविष्य के इलेक्ट्रिकल कार्य के लिए बहुत उपयोगी है
डम्पी लेवल प्रैक्टिकल
प्रस्तावना
डम्पी लेवल एक सर्वेक्षण उपकरण है। इसका उपयोग जमीन की सतह, ऊँचाई के अंतर और समतल रेखा को मापने के लिए किया जाता है। सड़क, भवन और नहर निर्माण में इसका अधिक उपयोग होता है।
उद्देश्य
डम्पी लेवल उपकरण को समझना
जमीन की लेवल मापना
दो बिंदुओं के बीच ऊँचाई का अंतर निकालना
सही और सटीक मापन करना
आवश्यक सामग्री
डम्पी लेवल
ट्राइपॉड स्टैंड
लेवलिंग स्टाफ
मापन डायरी
पेंसिल
प्रक्रिया
डम्पी लेवल को ट्राइपॉड पर ठीक से लगाएँ।
ट्राइपॉड के पैरों को जमीन में मजबूती से रखें।
स्क्रू की मदद से बबल को बीच में लाएँ।
स्टाफ को पहले बिंदु पर सीधा खड़ा करें।
आईपीस और ऑब्जेक्टिव को फोकस करें।
स्टाफ की रीडिंग लिखें।
अब दूसरे बिंदु पर स्टाफ रखें।
दूसरी रीडिंग लिखें।
दोनों रीडिंग का अंतर निकालें।
अवलोकन :
बबल बीच में आने पर उपकरण समतल होता है।
स्टाफ की रीडिंग साफ दिखाई देती है।
ऊँचाई का अंतर स्पष्ट पता चलता है।
निष्कर्ष
डम्पी लेवल की सहायता से जमीन की लेवल और ऊँचाई का अंतर सही तरीके से मापा जा सकता है। यह सर्वेक्षण और निर्माण कार्यों के लिए बहुत आवश्यक उपकरण है
निर्धूल चूल्हा क्या है?
निर्धूल चूल्हा ऐसा चूल्हा होता है जिसमें खाना पकाने पर
धुआँ, राख और धूल बहुत कम या बिल्कुल नहीं निकलती।
यह चूल्हा पारंपरिक मिट्टी या लकड़ी के चूल्हे की तुलना में
ज्यादा स्वच्छ, सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है।
🔹 निर्धूल चूल्हे की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पारंपरिक चूल्हों से:
- बहुत धुआँ निकलता है
- आँखों में जलन होती है
- साँस की बीमारी होती है
- रसोई और बर्तन काले हो जाते हैं
👉 इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए निर्धूल चूल्हा बनाया गया।
🔹 निर्धूल चूल्हे के प्रकार
1️⃣ एलपीजी गैस चूल्हा
- धुआँ नहीं निकलता
- खाना जल्दी पकता है
- शहरों और गाँवों में प्रचलित
2️⃣ बायोगैस चूल्हा
- गोबर और जैव अपशिष्ट से गैस
- पर्यावरण के अनुकूल
- सस्ता और टिकाऊ
3️⃣ उन्नत बायोमास (स्मोकलेस) चूल्हा
- लकड़ी/उपले कम जलते हैं
- धुआँ बहुत कम
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी
4️⃣ इंडक्शन / इलेक्ट्रिक चूल्हा
- बिल्कुल धुआँ नहीं
- बिजली से चलता है
- आधुनिक रसोई में उपयोग
🔹 निर्धूल चूल्हे के फायदे
✔ धुआँ नहीं – स्वास्थ्य सुरक्षित
✔ आँख और फेफड़ों को नुकसान नहीं
✔ ईंधन की बचत
✔ रसोई साफ़ रहती है
✔ महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित
✔ पर्यावरण प्रदूषण कम
🔹 निर्धूल चूल्हा और सरकार की योजनाएँ
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत
गरीब परिवारों को एलपीजी आधारित निर्धूल चूल्हे उपलब्ध कराए।
उद्देश्य:
- ग्रामीण महिलाओं को धुएँ से मुक्ति
- स्वच्छ और सुरक्षित रसोई
🔹 निर्धूल चूल्हा किसके लिए सबसे उपयोगी?
- ग्रामीण परिवार
- महिलाएँ और बुज़ुर्ग
- अस्थमा/एलर्जी से पीड़ित लोग
- पर्यावरण संरक्षण के इच्छुक लोग
🔹 निष्कर्ष
निर्धूल चूल्हा स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण के लिए
एक बेहतर और आधुनिक समाधान है।
यह पारंपरिक चूल्हों की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक है।
अगर आप चाहें तो मैं यह भी बता सकता हूँ:
- निर्धूल चूल्हा कैसे बनता है
- ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे सस्ता मॉडल
- स्कूल परीक्षा के लिए छोटा उत्तर
- चित्र सहित समझाना
बस बताइए
निर्धूल चूल्हे में कितना ईंधन बचता है?
निर्धूल चूल्हा पारंपरिक चूल्हे की तुलना में काफी कम ईंधन में खाना पकाता है।
🔹 ईंधन की बचत
- पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे में
➝ बहुत ज़्यादा लकड़ी / उपले लगते हैं - निर्धूल (स्मोकलेस) चूल्हे में
➝ 30% से 50% तक ईंधन की बचत होती है
🔹 अलग-अलग निर्धूल चूल्हों में ईंधन बचत
1️⃣ उन्नत बायोमास निर्धूल चूल्हा
- 40%–50% कम लकड़ी
- 1 किलो लकड़ी में ज़्यादा समय तक आग
2️⃣ एलपीजी गैस चूल्हा
- पारंपरिक चूल्हे की तुलना में
➝ लगभग 50%–60% ऊर्जा की बचत - गैस जल्दी गर्म करती है
3️⃣ बायोगैस चूल्हा
- ईंधन लगभग मुफ्त
- गोबर से गैस बनती है
- बहुत कम खर्च
🔹 ईंधन बचत के फायदे
✔ पैसे की बचत
✔ लकड़ी कम जलने से जंगल सुरक्षित
✔ समय की बचत
✔ कम धुआँ, बेहतर स्वास्थ्य
🔹 आसान उदाहरण
अगर पहले रोज़ 10 किलो लकड़ी लगती थी,
तो निर्धूल चूल्हे में
👉 5–7 किलो लकड़ी ही काफी होती है।
✨ निष्कर्ष
निर्धूल चूल्हा
कम ईंधन में ज़्यादा काम करता है,
इसलिए यह आर्थिक, स्वास्थ्य और पर्यावरण — तीनों के लिए फायदेमंद है।
अगर आप चाहें तो मैं इसे
- एक लाइन में उत्तर,
- कक्षा 5–8 के लिए,
- या परीक्षा लिखने योग्य भाषा में भी लिख दूँ
Slide 2 : निर्धूल चूल्हा क्या है?
- निर्धूल चूल्हा ऐसा चूल्हा है
- जिसमें खाना पकाने पर
- धुआँ
- राख
- धूल
बहुत कम या बिल्कुल नहीं निकलती
- यह स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है
🟦 Slide 3 : निर्धूल चूल्हे की आवश्यकता
पारंपरिक चूल्हों से:
- बहुत अधिक धुआँ निकलता है
- आँखों में जलन होती है
- साँस की बीमारी होती है
- रसोई और बर्तन काले हो जाते हैं
👉 इन समस्याओं के समाधान के लिए निर्धूल चूल्हा बनाया गया
🟦 Slide 4 : निर्धूल चूल्हे के प्रकार
- एलपीजी गैस चूल्हा
- बायोगैस चूल्हा
- उन्नत बायोमास (स्मोकलेस) चूल्हा
- इंडक्शन / इलेक्ट्रिक चूल्हा
🟦 Slide 5 : एलपीजी गैस चूल्हा
- धुआँ नहीं निकलता
- खाना जल्दी पकता है
- शहरों और गाँवों में उपयोग
🟦 Slide 6 : बायोगैस चूल्हा
- गोबर और जैव अपशिष्ट से गैस
- पर्यावरण के अनुकूल
- सस्ता और टिकाऊ
🟦 Slide 7 : उन्नत बायोमास चूल्हा
- लकड़ी और उपले कम जलते हैं
- धुआँ बहुत कम
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी
🟦 Slide 8 : इंडक्शन / इलेक्ट्रिक चूल्हा
- बिल्कुल धुआँ नहीं
- बिजली से चलता है
- आधुनिक रसोई में उपयोग
🟦 Slide 9 : निर्धूल चूल्हे के फायदे
- स्वास्थ्य सुरक्षित
- आँख और फेफड़ों को नुकसान नहीं
- ईंधन की बचत
- रसोई साफ रहती है
- पर्यावरण प्रदूषण कम
🟦 Slide 10 : सरकार की योजना
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
- गरीब परिवारों को एलपीजी चूल्हा
- ग्रामीण महिलाओं को धुएँ से मुक्ति
- सुरक्षित और स्वच्छ रसोई
🟦 Slide 11 : ईंधन की बचत
- पारंपरिक चूल्हा:
- बहुत ज़्यादा लकड़ी लगती है
- निर्धूल चूल्हा:
- 30% से 50% तक ईंधन की बचत
🟦 Slide 12 : ईंधन बचत के उदाहरण
- पहले: 10 किलो लकड़ी प्रतिदिन
- अब: 5–7 किलो लकड़ी
- पैसे और समय दोनों की बचत
🟦 Slide 13 : किसके लिए उपयोगी?
- ग्रामीण परिवार
- महिलाएँ और बुज़ुर्ग
- अस्थमा / एलर्जी के रोगी
- पर्यावरण प्रेमी लोग
🟦 Slide 14 : निष्कर्ष
- निर्धूल चूल्हा आधुनिक समाधान है
- स्वास्थ्य, पर्यावरण और पैसे की बचत
- पारंपरिक चूल्हे से अधिक सुरक्षित