बंधकाम

प्रस्तावना

गेस्ट हाउस का निर्माण इस उद्देश्य से किया जाता है कि आने वाले अतिथियों को सुरक्षित, स्वच्छ और आरामदायक रहने की सुविधा मिल सके। इस निर्माण प्रक्रिया में योजना, सामग्री खरीद, नींव डालना, दीवारें बनाना, छत का काम, बिजली व पानी की लाइनें लगाना आदि कई चरण शामिल होते है

उद्देश्य

  • अतिथियों को बेहतर रहने की सुविधा देना
  • संस्थान/कंपनी की छवि को मजबूत बनाना
  • मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाली इमारत का निर्माण करना
  • सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त सुरक्षित गेस्ट हाउस तैयार करना

सर्व

गेस्ट हाउस निर्माण में उपयोग होने वाली प्रमुख सामग्री:

  • सीमेंट
  • ईंटें / ब्लॉक
  • लोहे के सरिए (TMT Bars)
  • पानी
  • दरवाज़े और खिड़कियाँ (लकड़ी/एल्यूमिनियम)
  • प्लंबिंग सामग्री – पाइप, नल, फिटिंग
  • इलेक्ट्रिक सामग्री – वायर, स्विच, MCB, पैनल
  • सोलर लाइन/पाइप (जरूरत अनुसार)

कृती

  1. साइट सर्वेक्षण – जगह का माप, लेवल जांच
  2. नक्शा व लेआउट तैयार करना
  3. नींव खोदना और कंक्रीट डालना
  4. स्तंभ (खंभे) और बीम बनाना
  5. दीवारों का निर्माण
  6. छत (स्लैब) डालना
  7. प्लंबिंग कार्य – पानी की लाइनें, नल फिटिंग
  8. इलेक्ट्रिकल कार्य – वायरिंग, स्विच बोर्ड
  9. दरवाजे और खिड़कियाँ लगाना
  10. फर्श टाइल्स लगाना
  11. प्लास्टर और पेंटिंग का कार्य

मुझे इससे क्या सीखने को मिला

  • निर्माण के प्रत्येक चरण का महत्व समझ में आया
  • सामग्री का सही उपयोग और मात्रा का ज्ञान हुआ
  • पानी और बिजली की लाइनें कैसे लगाई जाती हैं, यह सीखने को मिला
  • सुरक्षा नियमों का पालन करना कितना ज़रूरी है, यह समझ आया
  • टीमवर्क और समन्वय की अहमियत जानी

निरीक्षण

  • अच्छी गुणवत्ता की सामग्री से निर्माण अधिक मजबूत होता है
  • सही योजना और समय प्रबंधन से काम तेज़ और सही होता है
  • बारिश के मौसम में निर्माण कार्य धीमा पड़ जाता है
  • प्रत्येक चरण की सही जाँच करने से गलतियाँ कम होती हैं

निष्कर्ष

गेस्ट हाउस का निर्माण एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है जिसमें बेहतर सामग्री, सही योजना और कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है। यदि निर्माण अच्छी तरह किया जाए तो गेस्ट हाउस लंबे समय तक टिकाऊ रहता है और अतिथियों को आरामदायक सुविधाएँ प्रदान करता है।

कोस्टिंग

अ. क्र.मालाचे नावएकूण मालदरएकूण किंमत
1ACC  1600801,28,000
2केमिकल 2350011,500
3मजुरी  [25%]34,875
total174,375

तेनी हाउस

प्रस्तावना

आज बढ़ती घरों की कीमत और जगह की कमी के कारण Tiny House एक अच्छा विकल्प बन रहा है। कम जगह में सभी सुविधाओं वाला, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल घर बनाया जा सकता है।

उद्देश्य

  • कम जगह में सभी सुविधाओं वाला घर बनाना
  • सस्ता, टिकाऊ और पोर्टेबल घर तैयार करना
  • पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का उपयोग करना
  • सरल जीवनशैली का संदेश देना

सर्वे

  • बड़े घरों की तुलना में लागत कम होती है
  • 200–400 वर्गफुट में तेनी हाउस बनाया जा सकता है
  • लकड़ी, स्टील, एल्यूमिनियम, AAC ब्लॉक और सौर ऊर्जा का उपयोग
  • अमेरिका, जापान और यूरोप में लोकप्रिय

सामग्री

  • लकड़ी / स्टील फ्रेम
  • छत के लिए टिन / सीमेंट शीट
  • दीवारों के लिए सीमेंट शीट
  • दरवाजे और खिड़कियाँ
  • प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल सामग्री

प्रक्रिया

  • तेनी हाउस का डिजाइन तैयार किया
  • सामग्री एकत्र की
  • बेस फ्रेम और स्ट्रक्चर बनाया
  • दीवारें, छत और फर्श लगाए
  • दरवाजे, खिड़कियाँ और इंटीरियर किया
  • बिजली और पानी की व्यवस्था की

मुझे यह सिखाने को मिला

  • कम सामग्री में उपयोगी घर बन सकता है
  • डिजाइन और योजना का महत्व
  • टीमवर्क और समय प्रबंधन
  • टिकाऊ निर्माण की जानकारी

निरीक्षण

  • घर मजबूत, हल्का और आकर्षक बना
  • कम सामग्री से लागत कम हुई
  • पोर्टेबल होने से कहीं भी ले जाया जा सकता है

निष्कर्ष

तेनी हाउस भविष्य का एक प्रभावी विकल्प है। यह कम खर्च, कम जगह और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देता है।

भविष्य में उपयोग

आपदा-ग्रस्त क्षेत्रों में अस्थायी निवासतेनी हाउस

ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती आवास

पर्यटन स्थलों पर कॉटेज

छत्री

प्रस्तावना

बरसात में भीगने से और गर्मी में तेज़ धूप से बचाव के लिए छत्री का उपयोग किया जाता है। छत्री मानव के दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण आविष्कार है। यह होटल और दुकानदारी के लिए भी उपयोगी होती है।

उद्देश्य

  • बारिश से बचाव करना
  • धूप से सुरक्षा पाना
  • हल्के और सुविधाजनक साधन से संरक्षण प्राप्त करना

सर्वे

आज बाजार में विभिन्न प्रकार की छतरियाँ उपलब्ध हैं:

  • फोल्डेबल छत्री
  • लंबी हैंडल वाली छत्री
  • ऑटो-ओपन छत्री
  • डिजाइनर छत्री

सामग्री

  • नायलॉन / पॉलिएस्टर कपड़ा
  • लोहे / स्टील की रॉड
  • स्प्रिंग और फोल्डिंग मैकेनिज़्म

कृती

  • छत्री का हैंडल और स्टील रॉड तैयार किए
  • रॉड में स्प्रिंग और फोल्डिंग सिस्टम जोड़ा
  • कपड़ा नाप के अनुसार काटकर रॉड पर सिलाई की
  • छत्री को खोल-बंद करके जांच की

मुझे यह सिखने को मिला

  • छत्री बनाने की प्रक्रिया की जानकारी मिली
  • सामग्री और संरचना का अध्ययन हुआ
  • दैनिक उपयोग की वस्तु का महत्व समझा

निरीक्षण

  • छत्री खोलना और बंद करना आसान है
  • मजबूत फ्रेम और टिकाऊ कपड़ा अधिक समय तक चलता है

निष्कर्ष

छत्री एक सरल और उपयोगी साधन है, जो हमें बारिश और धूप से सुरक्षा प्रदान करती है।

भविष्य में उपयोग

  • सोलर छत्री (ऊर्जा उत्पन्न करने वाली)
  • अधिक वाटरप्रूफ और टिकाऊ सामग्री की छत्री

CPM चार्ट (समय प्रबंधन)

कार्यसमय
3D डिजाइन8 घंटे
सामग्री लाना3 घंटे
माप लेना8 घंटे
कटिंग और वेल्डिंग8 घंटे
पॉलिशिंग और ग्राइंडिंग6 घंटे
पाउडर कोटिंग8 घंटे
छत्री फिटिंग3 घंटे
प्लाज़्मा कटिंग2 घंटे
कुल समय6 दिन


नर्सरी (बाहर काम )

प्रस्तावना

6×6 आकार के शेड के लिए चारों तरफ 1 से 1.5 फुट के एंगल सपोर्ट लगाए गए। 16 फुट के सफेद कोटी पत्रों का उपयोग करके हरी शेडनेट लगाई गई। प्रोफाइल लगाकर सेल्फ स्क्रू से शेडनेट फिट की गई। शेड को मजबूती देने के लिए GI एंगल की जोड़ाई की गई तथा हुक, वेल्डिंग और कीलों का उपयोग किया गया।

सर्वे

प्रोफाइल और सेल्फ स्क्रू की सहायता से शेडनेट लगाई गई। GI एंगल से जोड़ाई कर हुक, वेल्डिंग और कीलों का उपयोग किया गया। पीछे की ओर अतिरिक्त सपोर्ट के लिए GI एंगल लगाए गए। शेडनेट को प्रोफाइल से स्प्रिंग द्वारा जोड़ा गया तथा नीचे काले रंग की अच्छी कोटिंग की गई।

उद्देश्य

शेड को मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित बनाकर सूर्यप्रकाश, बारिश और धूल से संरक्षण प्राप्त करना तथा कार्य क्षेत्र को स्वच्छ और सुव्यवस्थित रखना इस कार्य का मुख्य उद्देश्य है।

सामग्री

  • 1 से 1.5 फुट एंगल
  • 6×6 शेड फ्रेम
  • 16 फुट सफेद कोटी पत्रा
  • हरी शेडनेट
  • प्रोफाइल और सेल्फ स्क्रू
  • GI एंगल (जोड़ाई व सपोर्ट हेतु)
  • हुक, स्प्रिंग और वेल्डिंग सामग्री

कृती

एंगल सपोर्ट लगाए गए, फ्रेम तैयार की गई, पत्रे लगाए गए। प्रोफाइल लगाकर सेल्फ स्क्रू मारे गए। शेडनेट को स्प्रिंग से जोड़ा गया। GI एंगल और वेल्डिंग से सपोर्ट दिया गया तथा अंत में नीचे काले रंग की अच्छी कोटिंग की गई।

मुझे यह सीखाने

शेड निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री, माप, जोड़ाई और सुरक्षा के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
एंगल, पत्रे, प्रोफाइल और शेडनेट लगाने की प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से सीखा।

निरीक्षण

  • सभी एंगल, पत्रे और शेडनेट ठीक प्रकार से लगे हुए पाए गए।
  • जोड़ मजबूत है।
  • सपोर्ट सही ढंग से लगाए गए हैं।
  • शेड स्थिर और सुरक्षित है।
  • कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक है।

निष्कर्ष

शेड निर्माण कार्य योजना के अनुसार सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ।
सभी सामग्री का सही उपयोग किया गया।
संरचना मजबूत, सुरक्षित और उपयोगी तैयार हुई।

भविष्य में उपयोग

इस शेड का उपयोग सामग्री भंडारण, वाहन पार्किंग, कार्य के लिए छाया तथा बारिश से सुरक्षा हेतु किया जा सकता है। इससे स्थान का बेहतर उपयोग होगा और संरचना लंबे समय तक टिकाऊ रहेगी।

डोम

प्रस्तावना

डोम का अर्थ गोल या अर्धगोलाकार संरचना होता है। प्राचीन काल से डोम प्रकार के निर्माण का उपयोग किया जाता रहा है। इस संरचना में मजबूती, आकर्षक डिजाइन तथा कम सामग्री में अधिक स्थान प्राप्त होता है।

उद्देश्य

  • डोम संरचना की जानकारी प्राप्त करना।
  • कम खर्च में मजबूत एवं आकर्षक संरचना तैयार करना।
  • शैक्षणिक परियोजना के माध्यम से निर्माण तकनीक सीखना।

सर्वेक्षण

  • प्राचीन वास्तुकला में डोम का उपयोग (मस्जिद, मंदिर, गॉथिक आर्किटेक्चर)।
  • वर्तमान समय में उपयोग – ग्रीनहाउस, स्टोरेज, स्पोर्ट्स हॉल, अस्थायी घर।
  • डोम के प्रकार – जियोडेसिक डोम, कंक्रीट डोम, बांस डोम।

सामग्री

  • लोहे/स्टील के पाइप या बांस
  • डोर / वेल्डिंग सामग्री
  • प्लास्टिक शीट या टिन शीट (कवरिंग के लिए)
  • स्क्रू, नट-बोल्ट, उपकरण (कटर, ड्रिल मशीन आदि)

कृती

  • डिजाइन के अनुसार डोम की गोलाकार फ्रेम तैयार करना।
  • पाइप/बांस को नट-बोल्ट या वेल्डिंग से जोड़ना।
  • सभी जोड़ अच्छी तरह कसकर मजबूत करना।
  • डोम पर कवर लगाना (प्लास्टिक शीट / टिन शीट)।
  • अंत में मजबूती की जांच करना।

मुझे यर सीखाने को मिला

  • डोम निर्माण की संरचना समझ में आई।
  • टीमवर्क और माप-तोल का महत्व समझा।

निरीक्षण

  • डोम हल्की सामग्री से भी मजबूत बनाया जा सकता है।
  • हवा का दबाव और प्राकृतिक शक्तियाँ डोम पर समान रूप से फैलती हैं, इसलिए यह संरचना टिकाऊ होती है।

निष्कर्ष

डोम प्रकार की संरचना सस्ती, आकर्षक और मजबूत होने के कारण आधुनिक निर्माण में अत्यंत उपयोगी है।

भविष्य में उपयोग

  • ग्रीनहाउस निर्माण
  • अस्थायी घर या शेल्टर
  • खेल मैदान और हॉल
  • स्टोरेज एवं कार्यशालाएँ

सीपीएम चार्ट

काम समय
साफ -सफाई 2 घंटे
मापन2 घंटे
सामग्री लाना 2 घंटे
दिवार निर्माण 5 घंटे
पुट्टी भरना 3 घंटे
डोम पर कलर मरना 16 घंटे
पेड को कटना 2 घंटे
कोहे का पाईप घिसना 1 घंटे
लोहे के पीइप को ओयल पेंट लगाना 8 घंटे
कुल समय 6 दिन

ग्रील

प्रस्तावना

गेस्ट हाउस की सुरक्षा और मजबूत निर्माण के लिए ग्रिल लगाना एक महत्वपूर्ण कार्य है। इस प्रोजेक्ट में हमने तीन अलग-अलग मापों की ग्रिल का सर्वे किया, उनका कॉस्टिंग किया, आवश्यक सामग्री खरीदी और स्वयं ग्रिल तैयार की। इस प्रक्रिया के दौरान वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, माप लेना, फ्रेम बनाना, रेड ऑक्साइड प्राइमर और पेंटिंग जैसी तकनीकी कुशलताओं को प्रत्यक्ष रूप से सीखने और उपयोग करने का अवसर मिला।

सर्वे:

सबसे पहले गेस्ट हाउस की खिड़कियों के माप लिए गए। सर्वे में निम्नलिखित तीन अलग-अलग आकार की ग्रिल की आवश्यकता पाई गई:

  1. पहली ग्रिल: 6’ × 5’
  2. दूसरी ग्रिल: 4’ × 7’
  3. तीसरी ग्रिल: 2’ × 20”

इन मापों के आधार पर कॉस्टिंग की गई और उसी अनुसार सामग्री खरीदी गई।

उद्देश्य:

  • गेस्ट हाउस के लिए आवश्यक आकार की मजबूत ग्रिल तैयार करना।
  • गेस्ट हाउस को सुरक्षा प्रदान करना।
  • धातु कार्य, वेल्डिंग, ग्राइंडिंग और फ्रेम फेब्रिकेशन कौशल का विकास करना।
  • कम खर्च में अच्छी गुणवत्ता की ग्रिल बनाना।

सामग्री:

  • 30 × 3 L-एंगल
  • 2 × 2 स्क्वेयर जाली
  • 10 × 10 स्क्वेयर बार
  • वेल्डिंग रॉड
  • ग्राइंडिंग डिस्क
  • रेड ऑक्साइड प्राइमर
  • काला ऑयल पेंट

आने वाली कठिनाइयाँ:

  • तीन अलग-अलग माप होने के कारण प्रत्येक ग्रिल की फ्रेम अलग-अलग तरीके से मापनी पड़ी।
  • स्क्वेयर बार का अंतर सटीक रखना समय-साध्य रहा।
  • वेल्डिंग के बाद जॉइंट्स को स्मूथ करने के लिए अधिक ग्राइंडिंग करनी पड़ी।
  • बड़ी ग्रिल को उठाना और सीधा रखना कठिन रहा।

निरीक्षण:

सभी ग्रिल मजबूत और सही माप में तैयार हुईं। L-एंगल और स्क्वेयर बार के उपयोग से ग्रिल की मजबूती काफी बढ़ी। पेंटिंग से ग्रिल को आकर्षक फिनिश मिली। पूरी प्रक्रिया में सटीक माप रखना सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा।

निष्कर्ष:

इस प्रोजेक्ट से हमें ग्रिल फेब्रिकेशन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, फ्रेम बनाना, प्राइमिंग और पेंटिंग का अच्छा ज्ञान हुआ। गेस्ट हाउस के लिए आवश्यक सभी ग्रिल सफलतापूर्वक तैयार की गईं और कम खर्च में उच्च गुणवत्ता प्राप्त हुई।

भविष्य में उपयोग:

भविष्य में इसी प्रकार की ग्रिल, दरवाजे, फेंसिंग या खिड़की संरचनाएँ बनाई जा सकती हैं। इन कौशलों का उपयोग कर स्वतंत्र कार्य या स्वयं का व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है।

कोस्टिंग

अ. क्र.मालाचे नावएकूण मालदरएकूण किंमत
130X30x3 L angal210 kg7014,700
210X10 [] BAR424 kg6025,440
32X2 जाळी[168] 2f223,696
430 x 3 पट्टी27 kg701,890
5रॉड पुडा34001,200
6कटींग व्हिल2025500
7ग्रीडिंग व्हिल2030600
8पॉलिश व्हिल1030600
9कटींग व्हिल [14 in]2200400
10प्रायमर4 l240960
11थीनर2 l120240
12ब्रश440160
13Electricity [10%]5,000
14मजुरी [15%]8,000
15TOTAL63,000

कोट

प्रस्तावना

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य एक मजबूत, टिकाऊ और आकर्षक लोहे का कॉट (Cot) तैयार करना था। इस कार्य में कॉट का डिज़ाइन, फ्रेम बनाना, ग्राइंडिंग, वेल्डिंग, रेड ऑक्साइड और पेंटिंग जैसी सभी प्रक्रियाएँ स्वयं करके मेटल फैब्रिकेशन के मूलभूत कौशल सीखना उद्देश्य था।

सर्वे

  • बाज़ार में उपलब्ध मेटल ट्यूब की मोटाई, प्रकार और गुणवत्ता की जानकारी
  • 1×2 स्क्वेयर ट्यूब और 1×1 सपोर्ट ट्यूब की मजबूती
  • वेल्डिंग व ग्राइंडिंग के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता
  • रेड ऑक्साइड और ऑयल पेंट की टिकाऊपन और कीमत

उद्देश्य

इस कॉट को बनाने का मुख्य उद्देश्य गेस्ट हाउस में उपयोग के लिए एक मजबूत, टिकाऊ और आरामदायक लोहे का कॉट तैयार करना था।
गेस्ट हाउस में फर्नीचर पर अधिक उपयोग और वजन पड़ता है, इसलिए स्क्वेयर ट्यूब का उपयोग कर मजबूती को प्राथमिकता दी गई।
कम मेंटेनेंस वाला, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाला फर्नीचर तैयार करना इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य था।

सामग्री

  • 1” × 2” स्क्वेयर ट्यूब
  • 1” × 1” स्क्वेयर ट्यूब
  • 0.75” × 0.75” स्क्वेयर ट्यूब
  • वेल्डिंग रॉड
  • ग्राइंडिंग डिस्क
  • पॉलिश व्हील
  • रेड ऑक्साइड प्राइमर
  • काला ऑयल पेंट
  • पॉलिश पेपर
  • लंबी (पुट्टी)
  • कटिंग मशीन, वेल्डिंग मशीन

प्रक्रिया (कृती)

  1. सबसे पहले कॉट का पूरा डिज़ाइन तैयार किया गया।
  2. माप, फ्रेम का आकार और सपोर्ट की जगह निश्चित की गई।
  3. 1×2 स्क्वेयर ट्यूब से ऊपर की मुख्य फ्रेम बनाई गई।
  4. कोनों पर सही जॉइंट बनाकर वेल्डिंग की गई।
  5. मजबूती के लिए 1×1 स्क्वेयर ट्यूब के 2 सपोर्ट लगाए गए।
  6. सभी सपोर्ट समान दूरी पर फिट किए गए।
  7. पूरी फ्रेम की ग्राइंडिंग कर वेल्डिंग जॉइंट्स को स्मूथ किया गया।
  8. 15 इंच लंबाई के 1.5×1.5 ट्यूब के पाँव (Legs) लगाए गए।
  9. पाँवों की वेल्डिंग व ग्राइंडिंग की गई।
  10. पूरे कॉट को पॉलिश व्हील से पॉलिश किया गया।
  11. जंग से बचाने के लिए रेड ऑक्साइड लगाया गया।
  12. रेड ऑक्साइड सूखने के बाद जॉइंट पर पुट्टी लगाकर पॉलिश पेपर से घिसाई की गई।
  13. अंत में काला ऑयल पेंट लगाकर फाइनल फिनिशिंग दी गई।

आई हुई कठिनाइयाँ

  • 1×1 सपोर्ट टुकड़ों का सटीक माप रखना
  • वेल्डिंग के समय ट्यूब को सीधा रखना
  • ग्राइंडिंग में सतह पूरी तरह सपाट करने में अधिक समय लगा
  • रेड ऑक्साइड सूखने में देरी होने से आगे की प्रक्रिया लेट हुई
  • पाँव और फ्रेम को एक ही लेवल में लाना चुनौतीपूर्ण था

निरीक्षण

  • वेल्डिंग और ग्राइंडिंग से कॉट की मजबूती और फिनिशिंग अच्छी हुई।
  • सभी सपोर्ट सही तरीके से लगाए जाने से फ्रेम मजबूत बना।
  • रेड ऑक्साइड से धातु को जंग से सुरक्षा मिली।
  • काले पेंट से कॉट आकर्षक और टिकाऊ बना।

निष्कर्ष

इस प्रोजेक्ट से मेटल फैब्रिकेशन के महत्वपूर्ण कौशल जैसे डिज़ाइनिंग, कटिंग, वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, पॉलिशिंग और पेंटिंग का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
एक मजबूत और गुणवत्तापूर्ण लोहे का कॉट सफलतापूर्वक तैयार किया गया।

भविष्य में उपयोग

  • घर, हॉस्टल और गेस्ट हाउस के लिए टिकाऊ कॉट
  • कस्टम फर्नीचर डिज़ाइन करने के लिए आधारभूत कौशल
  • विभिन्न आकार के लोहे के फ्रेमवर्क बनाने के लिए तकनीकी ज्ञान

कॉस्टिंग :

अ . क्रमालाचे नावएकूण मालदरएकूण किंमत
10.75 x 0.75 स्क्वेअर ट्यूब20′25500
21 x 2 स्क्वेअर ट्यूब360′3010,800
31 x 1स्क्वेअर ट्यूब100′353,500
41/2 x 1/2 स्क्वेअर ट्यूब100′404,000
5रॉड पुडा2400800
6कटींग व्हिल525125
7ग्रीडिंग व्हिल530150
8पॉलिश व्हिल330150
9कटींग व्हिल [14 in]1200200
10लंबी2 kg5001000
11प्रायमर2 L240480
12थीनर2 L120240
13काळा ऑईल पेंट2 L340680
14रोलर15050
15Electricity [10%]2,270
16मजुरी [15%]3,400
17total28,350

प्रस्तावना

वर्कशॉप में मशीनों को सुरक्षित रखने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कार्यस्थल पर अनुशासन बनाए रखने के लिए एक अलग मशीन स्टोर रूम की आवश्यकता थी। उपलब्ध स्क्रैप से प्राप्त लोहे के रूम का पुनः उपयोग करके कम लागत में मशीनों को रखने के लिए उपयुक्त एवं मजबूत स्टोर रूम बनाने के उद्देश्य से यह परियोजना कार्यान्वित की गई।

सर्वेक्षण

कार्य प्रारंभ करने से पूर्व मशीनों के आकार, वजन एवं संख्या का निरीक्षण किया गया। साथ ही स्क्रैप में उपलब्ध लोहे के रूम की मजबूती, उपलब्ध स्थान तथा मशीनों को रखने हेतु आवश्यक खानों (कप्पों) की आवश्यकता का परीक्षण किया गया। इसके अनुसार एक ओर 6 खाने तथा पूरे रूम में कुल 18 खाने बनाने का निर्णय लिया गया।

उद्देश्य

  • मशीनों को सुरक्षित रखने हेतु अलग स्टोर रूम का निर्माण करना
  • मशीनों को नुकसान, जंग एवं धूल से बचाना
  • स्क्रैप सामग्री का पुनः उपयोग कर लागत कम करना
  • मशीनों की सुव्यवस्थित व्यवस्था कर कार्यक्षमता बढ़ाना

सामग्री

25×25×3 मिमी L एंगल, आधा इंच जाली (62 वर्ग फुट), पंचिंग शीट (45 वर्ग फुट), 1 इंच स्क्रू (200 नग), स्टार बिट, बिल्डिंग फावड़ा, 14 इंच कटिंग व्हील, ग्राइंडिंग व्हील, कटिंग व्हील, वेल्डिंग रॉड (2 नग), रेड ऑक्साइड प्राइमर 2.5 लीटर, पीला ऑयल पेंट 2 लीटर, तथा दो प्रकार की जालियों का उपयोग किया गया।

कार्यविधि

स्क्रैप में उपलब्ध लोहे के रूम को बाहर निकालकर उसकी सफाई एवं मरम्मत की गई। मशीन रखने के लिए उचित माप लेकर L एंगल की सहायता से मजबूत फ्रेम तैयार की गई। एक ओर 6 खाने तथा पूरे रूम में कुल 18 खाने बनाकर उनमें विभिन्न मशीनों एवं पार्ट्स को रखने की व्यवस्था की गई। जाली एवं पंचिंग शीट को कटिंग कर स्क्रू एवं वेल्डिंग की सहायता से फिक्स किया गया। कटिंग व ग्राइंडिंग कर किनारों को चिकना किया गया। अंत में जंग से बचाव हेतु रेड ऑक्साइड प्राइमर तथा उस पर पीला ऑयल पेंट लगाया गया।

निरीक्षण

तैयार की गई मशीन स्टोर रूम मजबूत एवं सुरक्षित है। खानों के कारण मशीनों को अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्थित रूप से रखा जा सकता है। जाली के कारण हवा का संचार बना रहता है, जिससे मशीनों पर नमी एवं जंग कम होती है।

निष्कर्ष

मशीनों को रखने के लिए बनाई गई यह स्टोर रूम कम लागत में, टिकाऊ एवं उपयोगी सिद्ध हुई। स्क्रैप सामग्री का उचित उपयोग हुआ है तथा मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है।

भविष्य में उपयोग

यह मशीन स्टोर रूम वर्कशॉप, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र अथवा कृषि यंत्रों के भंडारण हेतु उपयोग में लाई जा सकती है। भविष्य में इसी डिज़ाइन में अधिक क्षमता वाली मशीन स्टोर रूम भी बनाई जा सकती हैं।

कॉस्टिंग

अ.मालाचे नावएकूण माल दर  /   रुकिंमत
125x25x3 L२००फूट३०६०००
2जाळी१३x६  ५०१९००
3पंचींग जाळी६x७६०२५२०
4पट्टी२०३०६००
5वायसर२००२००
6स्क्रू२००६००
7स्टार बीट४०४०
8कडी कोंडा७०७०
9बिजागरी४०२४०
10थिनर२ लिटर१२०२४०
11ब्रश५०१००
12रोलर५०१००
13रेड ऑक्साईड३ लिटर१२०३६०
14कलर३लिटर३३०९९०
15प्लाय९६  १९००५७००
16व्हील३००३००
17प्लेट२००८००
18नट बोल्ट१६९६
19चाक७००२८००
20  एकूण किंमत२३६५६

प्रस्तावना

(घर/इमारत/ऑफिस) येथे रंगकाम करण्यासाठी हा प्रकल्प सादर करण्यात येत आहे. सदर रंगकाम उच्च दर्जाचे साहित्य, अनुभवी कामगार आणि आधुनिक पद्धतींचा वापर करून केले जाईल. काम सुरू करण्यापूर्वी संपूर्ण साइटची पाहणी करून भिंतींची सध्याची स्थिती, आवश्यक दुरुस्ती, पुट्टी, प्रायमर व रंगाचे कोट यांचा योग्य अंदाज घेतला आहे. सर्व काम ठरलेल्या कालमर्यादेत आणि समाधानकारक गुणवत्तेसह पूर्ण करण्याची हमी देण्यात येत आहे.

सर्वेक्षण

रंगकामासाठी आम्ही सर्वेक्षण केले. सर्व खोल्या पाहून किती साहित्य लागेल, किती रंग आवश्यक आहे, किती ब्रश, रोलर लागतील आणि काम पूर्ण करण्यासाठी किती वेळ लागेल याचा अंदाज घेतला. या सर्व गोष्टींचा विचार करून संपूर्ण सर्वेक्षण पूर्ण केले.

उद्देश्य

इमारतीच्या अंतर्गत व बाह्य भिंतींना आकर्षक आणि टिकाऊ स्वरूप देणे, भिंतींचे संरक्षण करणे तसेच परिसर स्वच्छ, सुरक्षित व सुंदर ठेवणे हा या रंगकामाचा मुख्य उद्देश आहे. योग्य दर्जाचे साहित्य वापरून आणि नियोजित पद्धतीने रंगकाम करून भिंतींवरील जुना रंग, भेगा व दोष दूर करून इमारतीचे आयुष्य वाढवणे हा या कामाचा हेतू आहे.

साहित्य

  1. वॉल प्रायमर (Water Based / Cement Primer)
  2. स्वच्छ पाणी (प्रायमर मिसळण्यासाठी – आवश्यक असल्यास)
  3. रोलर
  4. ब्रश
  5. पेंट ट्रे
  6. पुट्टी नाईफ / स्क्रॅपर
  7. सॅंड पेपर

प्रक्रिया (कृती)

सर्वप्रथम भिंतींवरील तुटलेले भाग दुरुस्त करून पुट्टी लावली व सॅंड पेपरने घासून भिंत गुळगुळीत केली. त्यानंतर प्रायमर तयार केला. पाच लिटर प्रायमरमध्ये साधारण एक ते दोन लिटर पाणी मिसळून ते चांगले ढवळले. प्रथम थोड्या भागावर चाचणी केली. योग्य वाटल्यावर संपूर्ण भिंतीवर रोलरच्या सहाय्याने प्रायमरचे दोन कोट दिले. अशा प्रकारे रंगकामाची प्रक्रिया पूर्ण केली.

मी काय शिकलो

  1. रंग कसा लावायचा हे शिकलो
  2. पुट्टी भरण्याची पद्धत शिकलो
  3. सॅंड पेपरने भिंत घासणे शिकलो
  4. रंगकामाशी संबंधित अनेक गोष्टी शिकायला मिळाल्या

भविष्यातील उपयोग

भविष्यात जर पेंटर उपलब्ध नसेल तर आपण स्वतः रंगकाम करू शकतो. तसेच या कौशल्याच्या आधारे स्वतःचा व्यवसाय सुरू करून व्यवसायिक बनू शकतो. स्वतःच्या घरात रंगकाम केल्यास खर्चही कमी होतो, त्यामुळे आर्थिक बचत होते.

निरीक्षण

दुसऱ्या दिवशी निरीक्षण केले असता रंग अतिशय सुंदररीत्या बसलेला दिसून आला. सुरुवातीला काम कठीण वाटले, पण एकदा सुरुवात केल्यावर काम करायला आवडू लागले. निरीक्षणात हेच आढळून आले.

निष्कर्ष

साइट सर्वेक्षणानुसार रंगकामासाठी आवश्यक तयारी व साहित्य निश्चित करण्यात आले. योग्य नियोजन केल्यास हे काम दर्जेदार आणि ठरलेल्या वेळेत पूर्ण करता येते.

अनुभव

  1. रंग लावण्याचा प्रत्यक्ष अनुभव मिळाला
  2. रंग मिसळण्याचा अनुभव आला
  3. विविध प्रकारच्या रंगांची माहिती मिळाली
  4. एकूणच रंगकामाचा चांगला अनुभव मिळाला

कॉस्टिंग

प्रस्तावना

फेरो सीमेंट एक आधुनिक निर्माण सामग्री है। इसमें सीमेंट, रेत, पानी और लोहे की जाली (वायर मेश) का उपयोग किया जाता है। फेरो सीमेंट वजन में हल्का लेकिन मजबूत होता है तथा कम खर्च में टिकाऊ निर्माण के लिए उपयोगी है। आजकल पानी की टंकियाँ, छत, दीवारें और सजावटी वस्तुओं के निर्माण में फेरो सीमेंट का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

सर्वेक्षण

फेरो सीमेंट के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित सर्वेक्षण किया गया:

  • निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों से चर्चा
  • शिक्षकों एवं अभिभावकों से जानकारी
  • इंटरनेट और पुस्तकों का अध्ययन
  • पास की फेरो सीमेंट की टंकियों का निरीक्षण

इस सर्वेक्षण से फेरो सीमेंट के फायदे और उपयोग समझ में आए।

उद्देश्य

इस परियोजना के उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • फेरो सीमेंट की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना
  • इसके घटकों और संरचना को समझना
  • पारंपरिक सीमेंट की तुलना में इसके फायदे जानना
  • आधुनिक निर्माण तकनीक का अध्ययन करना

सामग्री

इस परियोजना में उपयोग की गई सामग्री:

  • सीमेंट
  • रेत
  • पानी
  • लोहे की जाली (वायर मेश)
  • कॉपी, पेन एवं संदर्भ पुस्तकें

प्रक्रिया (कृती)

फेरो सीमेंट बनाने की प्रक्रिया निम्न प्रकार है:

  1. लोहे की जाली का आवश्यक आकार तैयार किया जाता है।
  2. सीमेंट और रेत का मिश्रण बनाया जाता है।
  3. इस मिश्रण को जाली पर परतों में लगाया जाता है।
  4. उचित तरीके से पानी छिड़ककर क्योरिंग की जाती है।

निरीक्षण

फेरो सीमेंट के अध्ययन से निम्नलिखित निरीक्षण प्राप्त हुए:

  • फेरो सीमेंट हल्का लेकिन मजबूत होता है।
  • कम मोटाई में अधिक मजबूती मिलती है।
  • इसमें दरारें पड़ने की संभावना कम होती है।
  • इसकी देखभाल का खर्च कम होता है।

निष्कर्ष

फेरो सीमेंट कम खर्च में टिकाऊ और मजबूत निर्माण के लिए एक उपयोगी सामग्री है। आधुनिक निर्माण क्षेत्र में इसका विशेष महत्व है। यदि सही विधि से इसका उपयोग किया जाए तो इसका जीवनकाल अधिक होता है।

भविष्य में उपयोग

फेरो सीमेंट का भविष्य में निम्नलिखित क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है:

  • पानी की टंकियाँ
  • घरों की छतें और दीवारें

परियोजना से क्या सीखा

इस परियोजना से मुझे निम्नलिखित बातें सीखने को मिलीं:

  • फेरो सीमेंट क्या है
  • आधुनिक निर्माण सामग्री के लाभ
  • सर्वेक्षण और निरीक्षण कैसे किया जाता है
  • जानकारी को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना

प्रस्तावना

नर्सरी शेड के लिए मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित संरचना आवश्यक होती है। वर्षा का पानी, सूर्य का प्रकाश और हवा के प्रभाव को सहन करने के लिए आर.सी.सी. कॉलम का उपयोग किया जाता है। इस परियोजना में नर्सरी शेड के लिए आर.सी.सी. कॉलम तैयार किया गया है, जिसमें लोहे की सरिया का ढांचा, उचित कवर तथा बॉक्स शटरिंग का उपयोग किया गया है।

सर्वेक्षण

नर्सरी शेड के लिए कॉलम निर्माण से पहले निम्नलिखित सर्वेक्षण किया गया:

  • भूमि की सतह और मजबूती की जाँच की गई
  • कॉलम निर्माण के लिए उचित स्थान निश्चित किया गया
  • नक्शे के अनुसार माप लिए गए
  • कॉलम की ऊँचाई 15 फीट 10 इंच निर्धारित की गई
  • संरचना का डायगोनल 23 फीट तय किया गया

इस सर्वेक्षण से कॉलम को सही स्थान पर और सुरक्षित रूप से बनाना संभव हुआ।

उद्देश्य

  • नर्सरी शेड के लिए मजबूत आधार तैयार करना
  • आर.सी.सी. कॉलम की वास्तविक निर्माण प्रक्रिया को समझना
  • लोहे की सरियों के ढांचे का सही उपयोग करना
  • टिकाऊ और लंबे समय तक उपयोगी संरचना बनाना

सामग्री

इस आर.सी.सी. कॉलम के निर्माण में निम्न सामग्री का उपयोग किया गया:

  • सीमेंट
  • रेत
  • गिट्टी (खड़ी)
  • पानी
  • लोहे की सरिया (स्टील रॉड)
  • बाइंडिंग वायर
  • बॉक्स शटरिंग (लकड़ी / प्लाई)
  • कवर ब्लॉक
  • मापने की टेप एवं लेवल

प्रक्रिया (कृती)

  1. कॉलम के स्थान की मार्किंग की गई।
  2. लोहे की सरियों को काटकर उनका ढांचा तैयार किया गया।
  3. सरियों को उचित कवर प्रदान किया गया।
  4. बॉक्स बनाकर शटरिंग लगाई गई।
  5. शटरिंग को अच्छी तरह कसकर लगाया गया।
  6. आर.सी.सी. कंक्रीट तैयार कर कॉलम में डाली गई।
  7. वाइब्रेशन देकर कंक्रीट को अच्छी तरह जमाया गया।
  8. शटरिंग हटाने के बाद उचित क्योरिंग की गई।

निरीक्षण

  • लोहे की सरियों का ढांचा मजबूत होने के कारण कॉलम स्थिर रहा।
  • बॉक्स शटरिंग से कॉलम को सही आकार प्राप्त हुआ।
  • सही अनुपात में कंक्रीट उपयोग करने से दरारें नहीं आईं।
  • क्योरिंग करने से कॉलम की मजबूती बढ़ी।

निष्कर्ष

नर्सरी शेड के लिए तैयार किया गया आर.सी.सी. कॉलम मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ सिद्ध हुआ है। उचित सर्वेक्षण, सही माप, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और सही कार्य विधि के कारण यह कॉलम भविष्य में आने वाले भार को आसानी से सहन कर सकता है।

भविष्य में उपयोग

  • नर्सरी शेड को लंबे समय तक मजबूत आधार मिलेगा।
  • पॉलीथिन शेड, नेट शेड या टिन शेड बनाने में उपयोगी।
  • कृषि एवं बागवानी संरचनाओं के लिए आदर्श।
  • भविष्य में विस्तार के समय कॉलम का पुनः उपयोग किया जा सकता है।

पाया आखणी

प्रस्तावना

किसी भी इमारत के निर्माण में पाय (नींव) एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक होता है। इमारत की मजबूती, टिकाऊपन और सुरक्षा पूरी तरह से नींव पर निर्भर करती है। नींव की सही रूपरेखा बनाकर, सही माप के अनुसार वास्तविक स्थल पर निशान लगाना जिस प्रक्रिया से किया जाता है, उसे पाय की आखणी (Foundation Layout) कहते हैं।

उद्देश्य

  • इमारत की नींव सही स्थान पर और सही माप में बनाना
  • नक्शे के अनुसार रेखाएँ, कोण, माप और लेवल को सही रखने का कौशल विकसित करना
  • निर्माण कार्य में होने वाली गलतियों और अनावश्यक खर्च से बचाव करना
  • नींव की मजबूती, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • वास्तविक साइट पर सेटिंग-आउट (Layout) करने की क्षमता प्राप्त करना
  • आगे के निर्माण कार्य (दीवारें, स्तंभ आदि) को सरल और सटीक बनाने के लिए आधार तैयार करना

सामग्री

  • मापने की फीता (Measuring Tape)
  • रस्सी / नायलॉन की डोरी
  • हथौड़ा
  • चूना पाउडर / खड़िया / चूने का घोल
  • समकोण जाँचने के लिए 3-4-5 विधि या स्क्वेयर

प्रक्रिया

  • आवश्यक माप लिए गए
  • पुट्टी और रेत को मिलाया गया
  • लिए गए माप के अनुसार पुट्टी की सहायता से नींव की आखणी की गई

पारा बांधकाम

निर्माण क्या है

निर्माण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी भौतिक संरचना का निर्माण या उन्नयन किया जाता है। इसके अंतर्गत भवन, पुल, सड़कें, बाँध आदि का निर्माण किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को ही निर्माण कार्य कहा जाता है।

निर्माण में उपयोग होने वाले प्रमुख बॉन्ड के प्रकार

स्ट्रेचर बॉन्ड :
इस बॉन्ड में ईंटों को उनकी लंबी साइड से एक-दूसरे के ऊपर रखा जाता है।

2) हेडर बॉन्ड :
इसमें प्रत्येक ईंट को उसकी चौड़ी साइड से दीवार में लगाया जाता है।

इंग्लिश बॉन्ड :
इसमें एक पंक्ति स्ट्रेचर बॉन्ड की और अगली पंक्ति हेडर बॉन्ड की होती है। यह बहुत मजबूत निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है।

फ्लेमिश बॉन्ड :
इस बॉन्ड में हर पंक्ति में स्ट्रेचर और हेडर ईंटों को बारी-बारी से लगाया जाता है।

निर्माण के लिए आवश्यक अनुपात

हर निर्माण कार्य में सही अनुपात बहुत महत्वपूर्ण होता है और उसका सही तरीके से उपयोग किया जाना चाहिए।

सीमेंट और रेत का अनुपात (मोर्टार रेशियो)

ईंट का काम : 1:6
तसला सीमेंट : 6 तसले रेत)

प्लास्टरिंग : 1:4
तसला सीमेंट : 4 तसले रेत)

कंक्रीट मिश्रण का अनुपात

साधारण निर्माण कार्य : 1:2:3
तसला सीमेंट : 2 तसले रेत : 3 तसले गिट्टी)

मजबूत RCC कार्य : 1:1.5:3
तसला सीमेंट : 1.5 तसले रेत : 3 तसले गिट्टी)

R.C.C का पूरा नाम : रिइनफोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट

सामग्री

  1. हाथगाड़ी
  2. फावड़ा
  3. रेत, सीमेंट, डस्ट
  4. ईंटें
  5. थापी
  6. तसले

निरीक्षण

पाइप की जगह की जाँच की।

पाइप की सुरक्षा और सफाई के लिए उचित चेंबर बनाया।

1:6 का अनुपात लिया (1 तसला सीमेंट और 6 तसले क्रश)।

काम की जगह पर पहले पानी डाला, फिर सामग्री डाली और ईंटों को पानी में भिगोया।

चेंबर तैयार किया और प्लास्टर किया।

कॉस्टिंग

क्रमांकसामग्री का नामकुल मात्रादर (₹)कीमत (₹)
1ईंटें90087200
2रेत3 ट्रॉली10003000
3सीमेंट15 बोरी3505350
4मुरूम3 ट्रॉली5001500

कृती

जगह साफ कर ली
नींव की रूपरेखा तय कर ली
नींव की खुदाई की
चारों ओर डोरी लगाकर लाइन खींच ली
निर्माण कार्य शुरू किया
लेवल निकाला
प्लास्टर किया
मुरुम (मिट्टी/गिट्टी) भरी

क्या सिखा

  • मिक्सर में सामग्री कैसे तैयार करनी है
  • निर्माण कार्य कैसे करना है
  • लेवल कैसे निकालते हैं
  • निर्माण कार्य का माप (मेज़रमेंट) निकालना सीखा

कोन कोन सा समस्या आई

  1. जमीन सही लेवल में नहीं थी
  2. ईंटें आगे-पीछे लग रही थीं
  3. सामग्री कभी कम तो कभी ज्यादा डाली जा रही थी
  4. सामग्री मिलाने के लिए पास में पानी उपलब्ध नहीं था

समस्यांओ पर किये गये उपयोग

  • सीमेंट भरकर जमीन का लेवल ठीक किया
  • लाइन-डोरी लगाकर ईंटें सीधी कतार में लगाईं
  • दोनों तरफ तख्ते लगाकर बीच में सीमेंट भरकर उस पर रंदा (फिनिश) किया
  • तालाब की पाइप लाइन को जोड़कर वाल्व से टंकी भरकर पानी का उपयोग किया

भविष्य उपयोग

नींव और कॉलम निर्माण का ज्ञान भविष्य में निर्माण क्षेत्र में बहुत उपयोगी है।
इस ज्ञान के आधार पर घर, स्कूल, इमारत, गोदाम आदि के निर्माण में मजबूत और सुरक्षित कॉलम बनाए जा सकते हैं।
अगर मुझे खुद निर्माण करना होगा, तो कॉलम बनाना भी जरूरी होगा।