बायोगॅस
- गोबर और पानी को मिलाकर घोल बनाया जाता है।इस घोल को एक बंद टैंक (बायोगैस प्लांट) में डाला जाता है।कुछ दिनों बाद बैक्टीरिया गोबर को सड़ाते हैं और गैस बनती है।इस गैस को पाइप के माध्यम से चूल्हे तक पहुँचाया जाता है।गोबर गैस के फायदे:एलपीजी की बचत होती है।रसोई में धुआँ कम होता है।पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचता है।प्लांट से निकलने वाली स्लरी बहुत अच्छी जैविक खाद होती है।कितना गोबर चाहिए?एक छोटे घरेलू प्लांट के लिए रोज़ लगभग 25–50 किलोग्राम गोबर की आवश्यकता होती है। यह सामान्यतः 2–4 गाय या भैंस के गोबर से मिल सकता है।यदि आप गाँव में गोबर गैस प्लांट लगाना चाहते हैं, तो मैं उसके �खर्च, सरकारी सब्सिडी और लगाने की पूरी प्रक्रिया भी बता सकता
