प्रस्तावना
सेप्टी
इससे आगे के उपकरण खराब नहीं होते।
बिजली बहुत उपयोगी होती है, लेकिन अगर सही तरीके से इस्तेमाल न की जाए तो खतरनाक भी हो सकती है। इसलिए कुछ जरूरी सुरक्षा नियम (Safety Rules) और उपकरण (Safety Devices) होते हैं।
यह बिजली की सबसे जरूरी सुरक्षा होती है।
अगर किसी वायर में लीकेज या शॉर्ट सर्किट हो जाए, तो करेंट धरती (Earth) में चला जाता है, न कि इंसान के शरीर में।
इससे बिजली का झटका (Electric Shock) नहीं लगता।
फ्यूज़ एक सुरक्षा तार होता है जो ज्यादा करंट आने पर जल जाता है।
जैसे ही फ्यूज़ उड़ता है, बिजली कट जाती है — मतलब सिस्टम सुरक्षित।
यह फ्यूज़ की तरह काम करता है लेकिन ऑटोमैटिक होता है।
अगर शॉर्ट सर्किट या ओवरलोड हो, तो यह तुरंत ट्रिप होकर बिजली काट देता है।
इसे फिर से “ON” करके चालू किया जा सकता है।
यह इंसान को करंट लगने से बचाने वाला डिवाइस है।
अगर कहीं से करेंट लीक होकर शरीर में जाने लगता है, तो यह तुरंत बिजली काट देता है।
इसे अक्सर “लाइफ सेविंग स्विच” भी कहते हैं।
सभी तारों के ऊपर प्लास्टिक कवर होता है ताकि करेंट बाहर न आए।
इसे छेड़ना या काटना बहुत खतरनाक होता है।
कभी भी गीले हाथों से स्विच या प्लग न छुएँ।
बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर, या खुले तारों से दूर रहें।
उपकरण: मल्टीमीटर (Multimeter)
मल्टीमीटर को Voltage मोड (V) पर सेट किया जाता है।
जिस बिंदु के बीच वोल्टेज मापना है, वहाँ
लाल प्रॉब → पॉज़िटिव बिंदु
काला प्रॉब → नेगेटिव/ग्राउंड बिंदु
लगाया जाता है।
मीटर स्क्रीन पर वोल्टेज दिखाई देता है।
वोल्टेज दो प्रकार का हो सकता है:
AC Voltage (V~) → घर की बिजली
DC Voltage (V–) → बैटरी, चार्जर, सोलर आदि
उपकरण: मल्टीमीटर (A मोड) या Clamp Meter
मल्टीमीटर को Ampere (A) मोड पर सेट किया जाता है।
जिस तार से धारा गुजर रही है, उसके सीरिज में मल्टीमीटर लगाया जाता है।
यानी करंट को मल्टीमीटर के अंदर से होकर गुजरना पड़ता है।
सिर्फ तार को clamp के अंदर ले जाना होता है।
मीटर बिना तार काटे करंट माप लेता है।
V=I×RV = I \times RV=I×R
V = वोल्टेज
I = करंट
R = रेज़िस्टेंस



