यहाँ वायर गेज (Wire Gauge) का तुलनात्मक चार्ट दिया गया है, जिसमें गेज नंबर के हिसाब से तारों की मोटाई (Thickness) दिखाई गई है:

वायरिंग गेज (Wire Gauge) तार की मोटाई (thickness या cross-sectional area) का माप होता है। तार का गेज यह तय करता है कि वह सुरक्षित रूप से कितना विद्युत करंट (Amperes) संभाल सकता है और उसमें कितना प्रतिरोध (Resistance) होगा।

1. गेज काम कैसे करता है? (गोल्डन रूल)
वायर गेज को समझने का सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है:
गेज नंबर जितना छोटा होगा, तार उतना ही मोटा होगा और उसकी करंट संभालने की क्षमता (Ampacity) उतनी ही ज्यादा होगी।
उदाहरण: 10 AWG का तार 14 AWG के तार से ज्यादा मोटा होता है और अधिक करंट ले जा सकता है।
2. वायर गेज मापने की मुख्य प्रणालियाँ
वायर की मोटाई मापने के दो मुख्य मानक इस्तेमाल होते हैं:
1. AWG (American Wire Gauge)
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और इलेक्ट्रॉनिक्स/ऑटोमोबाइल वायरिंग में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होता है।
इसमें नंबर (जैसे 10, 12, 14, 16) का प्रयोग होता है।
2. Sq mm (Square Millimeter – वर्ग मिलीमीटर)
भारत और यूरोपीय देशों में घरेलू वायरिंग के लिए sq mm (mm^2) मानक का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है (जैसे 1.5 sq mm, 2.5 sq mm, 4 sq mm)।
इसमें नंबर जितना बड़ा होगा, तार उतना ही मोटा होता हैं।
3. गेज, करंट क्षमता और उपयोग (Quick Reference Chart)
नीचे तांबे (Copper Wires) की वायरिंग के लिए सामान्य मान दिए गए हैं:

4. सही वायर गेज चुनना क्यों जरूरी है?
ओवरहीटिंग और आग से सुरक्षा: यदि पतले तार (जैसे 1.5 sq mm) पर AC या गीजर चला दिया जाए, तो करंट ज्यादा होने के कारण तार गर्म होकर पिघल जाएगा और शॉर्ट सर्किट या आग लग सकती है।
वोल्टेज ड्रॉप (Voltage Drop): अगर लंबी दूरी तक पतला तार ले जाया जाए, तो तार का रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिससे उपकरणों तक पूरा वोल्टेज नहीं पहुँच पाता।
बिजली की बचत: सही मोटाई का तार इस्तेमाल करने से बिजली की बर्बादी (हीटिंग लॉस) कम होती है।
5. सही गेज चुनने का तरीका (Formula)
जब भी किसी उपकरण के लिए तार का चुनाव करना हो, तो इस साधारण फॉर्मूले से करंट (I) निकालें:

उदाहरण: यदि 2000 Watt का गीज़र 220V पर चलता है:

सुरक्षा मार्जिन जोड़कर इसके लिए कम से कम 2.5 sq mm या 4 sq mm तार का इस्तेमाल करना चाहिए।