1. सीरीज़ कनेक्शन (Series Connection)सीरीज़ कनेक्शन में सभी लाइट्स एक ही लाइन में एक के बाद एक जोड़ी जाती हैं। इसमें बिजली बहने का सिर्फ एक ही रास्ता होता है।

कैसे होता है: पहले बल्ब का वायर दूसरे से, दूसरे का तीसरे से—इस तरह सभी बल्ब एक चेन में जुड़ते हैं।
उदाहरण: दिवाली या शादी-ब्याह की झालर (Fairy Lights)।
खासियत:अगर एक भी बल्ब खराब हुआ, तो पूरी झालर बंद हो जाएगी।जितने ज्यादा बल्ब जोड़ेंगे, सबकी रोशनी धीमी (Dim) होती जाएगी।
2. पैरेलल कनेक्शन (Parallel Connection)पैरेलल कनेक्शन में हर लाइट को मेन सप्लाई (Phase और Neutral) अलग से मिलती है। इसमें हर बल्ब के पास बिजली का अपना अलग रास्ता होता है।

कैसे होता है: सभी बल्बों के एक तरफ के तारों को एक साथ (Phase) और दूसरी तरफ के तारों को एक साथ (Neutral) जोड़ा जाता है।
उदाहरण: घर की वायरिंग (पंखा, ट्यूबलाइट, बल्ब सब पैरेलल होते हैं)।
खासियत:अगर एक बल्ब खराब भी हो जाए, तो बाकी सब चलते रहेंगे।
सभी बल्बों को पूरी वोल्टेज मिलती है, इसलिए सब फुल ब्राइटनेस पर जलेंगे।
